दुबौलिया ब्लॉक के उमरिया रिंगबाध के निकट कटान कर रही सरयू संवाद
बस्ती। उफान पर पहुंची सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार को घटकर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। जलस्तर में कमी से बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी उतरने लगा है, लेकिन घटते पानी के साथ कुछ स्थानों पर कटान तेज होने से तटीय गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, गांवों के आसपास गड्ढों में जमा पानी से संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने फॉगिंग और एंटीलार्वा का छिड़काव कराने की मांग की है।
केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार मंगलवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.23 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। इस तरह नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे रहा। विक्रमजोत क्षेत्र में सुबह आठ बजे जलस्तर 92.270 मीटर दर्ज किया गया, जो शाम चार बजे घटकर 92.230 मीटर हो गया।
दुबौलिया संवाद के अनुसार क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित सुविकबाबू और आंशिक टेढ़वा गांव से पानी उतर गया है। हालांकि, गांवों के आसपास गड्ढों में जलभराव बना हुआ है। इससे ग्रामीणों को संक्रमण फैलने की आशंका सता रही है। अशोकपुर माझा के पश्चिमी हिस्से में कृषि योग्य भूमि भी धीरे-धीरे नदी की धारा में कट रही है। उमरिया रिंग बांध के पास मंगलवार को भी कटान जारी रही। इसे रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से परक्यूपाइन और गैबियन लगाए जा रहे हैं।
विक्रमजोत क्षेत्र के लकड़ी पांडेय, पकड़ी संग्राम, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कटान प्रभावित गांवों में ग्रामीण नदी की तेज धारा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि जलस्तर कम होने के बावजूद नदी का दबाव बना हुआ है। इससे कृषि भूमि के साथ आबादी वाले क्षेत्रों को भी नुकसान का खतरा है। ग्रामीण मवेशियों और जरूरी सामान को लेकर भी सतर्क हैं। माझा क्षेत्र के किसान अनिल और संदीप ने बताया कि नदी लगातार कृषि योग्य भूमि काट रही है। ग्रामीणों ने जलभराव वाले क्षेत्रों में फॉगिंग और एंटीलार्वा का छिड़काव कराने की मांग की है।
कोट
कटान वाले क्षेत्रों में टीम लगातार निगरानी कर रही है। जलस्तर में कमी आई है और तटबंधों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड, बस्ती।