शिक्षकों की कमी से संस्कृत शिक्षा पर संकट
बस्ती। जिले में शिक्षकों की कमी के कारण संस्कृत शिक्षा पर संकट बढ़ता जा रहा है। जिले के 16 माध्यमिक और पांच महाविद्यालय जहां शिक्षकों की कमी झेल रहे हैं वहीं तीन महाविद्यालयों में प्राचार्य व आठ माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली हैं।
संस्कृत विषय के संबंध में देश भर में तमाम प्रयास हुए हैं। लेकिन जिले में अभी भी स्थिति ठीक नहीं है। जिले के माध्यमिक बोर्ड से 16 स्कूल संचालित होते हैं। इसमें माध्यमिक स्कूलों में कुल 78 पदों की जगह 26 और महाविद्यालयों में 25 में से 14 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। तीन महाविद्यालयों में प्राचार्य और आठ माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाचार्य के भी पद रिक्त हैं। महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित है। संस्कृत के माध्यमिक स्कूलों में जुलाई में शासन ने संस्कृत स्कूलों में संविदा आधारित शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश दिया था। जिसमें 11 स्कूलों में एक-एक संविदा शिक्षकों की भर्ती की गई। बावजूद इसके अभी 26 शिक्षकों का पद रिक्त है। वहीं, महाविद्यालयों में लंबे समय से कोई नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि हर वर्ष शिक्षक सेवानिवृत्त होते चले गए। लिहाजा महाविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था बदहाल होती चली जा रही है। जिसको लेकर प्रबंधकों ने विभागीय स्तर से शासन से पत्राचार भी किया लेकिन परिणाम शून्य रहा।
यहां नहीं हैं प्राचार्य व प्रधानाचार्य
जिले के श्री रामकृष्ण स्मारक संस्कृत विद्यालय बस्थनवां, श्री विश्राम संस्कृत माध्यमिक विद्यालय बखरिया, श्री संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय मखौड़ा, श्री सनातन धर्म संस्कृत माध्यमिक विद्यालय हरेवा, राजा भूपेंद्र प्रताप नारायण सिंह संस्कृत विद्यालय महराजगंज, संस्कृत माध्यमिक विद्यालय विष्णुपुर कप्तानगंज, संस्कृत माध्यमिक विद्यालय तरेता सोनौरा, गणेश संस्कृत पाठशाला दक्षिण दरवाजा में प्रधानाचार्य के पद कई वर्षों से रिक्त हैं। वहां श्रीमती मूर्तिमती संस्कृत विद्यापीठ धनघटा कोहरा, सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय नगर बाजार में प्राचार्य के रिक्त हैं। श्री पंचायती स्वामी ब्रह्मानंद आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, नया बाजार बस्ती में न प्राचार्य है न शिक्षक।
प्रबंधक राघवेंद्र प्रताप मिश्र ने बताया कि दूसरे महाविद्यालय के शिक्षक के पास कॉलेज का चार्ज मिला है। जबकि कोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आदेश दिया है। लेकिन, विभागीय लापरवाही के कारण शिक्षकों की भर्ती नहीं हो पा रही है। दो शिक्षक स्वयं के खर्च पर रखकर शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मारकंडेय सिंह ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया ठप होने के कारण संस्कृत की शिक्षण व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। सरकार को इस दिशा में कुछ सोचना चाहिए जिससे संस्कृत भाषा बची रहे।
डीआईओएस डीएस यादव ने बताया कि संस्कृत विद्यालयों व महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी की जानकारी शासन को भेजी गई थी। जिसको लेकर 11 शिक्षकों की संविदा पर नियुक्ति की गई है। शासन का जो निर्देश होगा उसका पालन किया जाएगा।