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Basti News: तड़के पांच बजे से कतार, फिर भी लाैटे खाली हाथ

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घर का चौका-बर्तन छोड़कर गैस सिलिंडर के लिए लाइन में लगी महिलाएं व युवतियां संवाद
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बस्ती। इलाके में घरेलू रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि इस संकट के पीछे गैस की कमी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर हो रही कालाबाजारी है।
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हालात ये हैं कि लोग सुबह पांच बजे से ही एजेंसियों के बाहर डेरा डाल रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। आरोप है कि जमाखोरों ने सिलिंडरों को डंप कर दिया है और जरूरतमंदों को वही सिलिंडर दोगुनी से ज्यादा कीमत पर यानी दो हजार रुपये में बेचा जा रहा है।
बता दें कि रसोई गैस सिलिंडर का संकट करीब एक दशक बाद फिर आ गया है। शहरी क्षेत्र में जिन घरों में पाइपलाइन से गैस पहुंच रहा है, वे थोड़ा सुकून में हैं, मगर उन्हें भी यह चिंता सता रही है कि ईरान-इस्राइल के बीच युद्ध यदि और लंबा खींचा तो उन्हें भी रसोई गैस का संकट झेलना पड़ सकता है। ऐसे में वे भी महीनों से खाली पड़े सिलिंडर भराने की जुगत में जुट गए हैं।
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उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि घंटों लाइन में लगने के बाद एजेंसी वाले पर्ची देते हैं, इसके बाद जमा होता है पैसा। जब तक यह प्रक्रिया उपभोक्ता पूरी करता है, तब तक टोकन खत्म हो जाएगा या फिर सिलिंडर। यह समस्या सिर्फ इंडियन एजेंसियों की है। जबकि भारत गैस की एजेंसियों पर केवाईसी की समस्या आ रही है।
आवास विकास कॉलोनी निवासी अरुंधती इंडियन गैस की कनेक्शन धारक हैं। इनके पति अजय श्रीवास्तव ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह करीब 11 बजे पटेल चौक स्थिति सन गैस सर्विस पर पासबुक जमा किया था। शाम करीब छह बजे पासबुक यह कहते हुए वापस कर दिया गया कि कनेक्शन नंबर गलत है।
अजय ने बताया कि एजेंसी पर डौजूद आपूर्ति विभाग के कर्मचारी से शिकायत करने पर फिर से पासबुक चेक कराया। इसके बाद नया कनेक्शन नंबर आवंटित किया गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार की सुबह 11:30 बजे जब वह टोकन लेने पहुंचे, तब तक टोकन खत्म हो चुके थे। अब उन्हें शनिवार को बुलाया गया है। मड़वानगर स्थित गैस एजेंसी पर सुबह करीब छह बजे 50 लोग कतार में खड़े देखे गए। महिलाएं और युवतियां लाइन में खड़ी होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। इसके बावजूद कई उपभोक्ताओं को सिलिंडर नहीं मिल पाया। कतार में खड़े नीरज त्रिपाठी ने बताया कि तीन मार्च को सिलिंडर की बुकिंग कराई थी, मगर अब तक घर सिलिंडर नहीं पहुंच पाया है।
एजेंसी पर जाकर जानकारी ली गई तो होम डिलीवरी के लिए साफ मनाकर दिया गया। कहा गया लाइन में लगकर ही सिलिंडर मिल पाएगा। नीरज ने बताया कि शुक्रवार की सुबह 6 बजे लाइन में लग गए थे। 10:30 बजे सिलिंडर मिल पाया।
केवाईसी भी खड़ी कर रही समस्या, इंडक्शन चूल्हा बना विकल्प : शहरी उपभोक्ताओं को एजेंसी पर पहुंचने पर केवाईसी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वजह है कि घर में पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति होने के नाते उन्होंने महीनों से सिलिंडर भराया ही नहीं था। अब जब घरेलू गैस का संकट उत्पन्न होने लगा है तब उन्हें सिलिंडर भराने की चिंता सताने लगी है। वहीं बहुत से उपभोक्ता आसानी से सिलिंडर उपलब्ध हो जाने से कनेक्शन का केवाईसी कराना ही भूल गए थे।
अब जब संकट खड़ा हो गया है तो उन्हें भी समस्या से जूझना पड़ रहा है। केवाईसी की प्रक्रिया कराने में दो से तीन दिन लग जा रहे हैं। लोगों के घर खाना बनाने का विकल्प इंडक्शन चूल्हा बन गया है। ऐसे में बाजार में इंडक्शन चूल्हे की बिक्री बढ़ गई हे। साथ ही इंडक्शन चूल्हे पर इस्तेमाल होने वाले बर्तन भी खूब बिक रहे हैं।
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