ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने साल भर पहले शासन को भेजा है प्रस्ताव
ब्लॉक में न्यूनतम 20 किमी सड़क का होना था निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले की 300 किमी लंबी 280 सड़कों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तब्दील करने की योजना अधर में लटक गई है। इसके लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर साल भर पहले शासन को भेज दिया था। जब तक शासन स्तर से इसे मंजूरी मिलती, इसी बीच लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया और आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आवागमन की सुविधा पर अल्प विराम लग गया है।
साल भर पहले उप मुख्यमंत्री व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सभी जिलों के हर ब्लॉकों में कम से कम 25 किमी सड़कों को प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत परिवर्तित करने का निर्देश जारी किया था। तत्कालीन अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार ने सहायक अभियंता अंकुर वर्मा, अवर अभियंता राजेश श्रीमाली, इं. बेचन राम व लालजी आदि की टीम को सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंप दी थी। जिले में बहुत सी ऐसी सड़कें हैं जिन पर 24 घंटे आवागमन होता है और वह जरूरत के हिसाब से कम चौड़ी हैं।
यही नहीं उनकी हालत भी खस्ता हो चुकी है। एक तरफ से वाहन आ जाने पर दूसरी तरफ से आने वाले वाहनों को पार करने में चालक को पसीना छूट जाता है। इन सड़कों की पटरियां भी खेतों में गुम हो चुकी हैं। लिहाजा टीम ने हर ब्लॉक में करीब 25 किमी सड़कों का चयन किया और इस तरह जिले के कुल 14 ब्लॉकों की 300 किमी 280 सड़कों को प्रधानमंत्री सड़क में परिवर्तित करने का खाका तैयार किया था। इन सड़कों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण पर 80 लाख रुपये प्रति किमी की दर से तकरीबन 2.40 अरब रुपये खर्च का अनुमान लगाया गया था।
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शासन को उपलब्ध करा दिया गया है प्रस्ताव
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्रस्ताव शासन को उपलब्ध करा दिया गया था। चुनाव समाप्त होने व स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।