संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 12वीं का छात्र आदर्श पांडेय जिस हास्टल में रहता था, वहां घटना के बाद मंगलवार को मकान मालिक का परिवार, साथ रहने वाले छात्र, मित्र, पड़ोसी शोक में डूबे नजर आए। दोस्तों का कहना है कि उन लोगो ने मजाक में भी नहीं सोचा था कि आदर्श ऐसा कदम उठाएगा। मकान मालकिन का कहना था कि आदर्श को रहते हुए दो साल हो गया था। कभी ऐसा नहीं लगा कि वह ऐसा कदम उठा लेगा। रात नौ बजे टिफिन देेने गई तो कमरा बंद था। आवाज देने पर भी नहीं खुला तो उसके पापा के पास फोन किया। उसके बाद 112 नंबर पर फोन की तब घटना के बारे में जानकारी हुई।
मकान मालकिन की सास चंद्रावती देवी ने कहा कि हम लोग आदर्श से मजाक में कह देते का कान में खूटा लगाए हो (मोबाइल का लीड लगाने पर) हंस कर बात टाल देता था। मकान मालिक संजय पांडेय बताते हैं वह बहुत सीधा साधा था। फिजिक्स का पेपर देकर आने के बाद से वह परेशान लग रहा था। कुछ दिन पहले वह घर भी गया था। पड़ोस में रहने वाले अभिषेक पांडेय का कहना है कि वह गंभीर था। किसी से अधिक बातचीत नहीं करता था।
आदर्श की मौत की खबर से उसके स्कूल, हास्टल के दोस्त शोक में डूबे नजर आए। पोस्टमार्टम हाउस पर शोकाकुल मित्र आशीष पांडेय ने बताया कि आदर्श उसके साथ सरस्वती विद्यामंदिर इंटर काॅलेज में पढ़ता था। फिजिक्स का पेपर खराब होने के बाद वह निराश नजर आया था। कक्षा नौ और 10 में हम लोग हास्टल में साथ रहते थे। बाद में वह पीजी में रहने लगा।
छात्र अस्मित मिश्रा बताते हैं कि मैंथ का छात्र आदर्श बहुत सीधा साधा था। पेपर देने के बाद वह बोला था, मेरा सात नंबर ही आएगा। शायद एक विषय में उसका कंपार्टमेंट भी आ गया था। पेपर के दिन थोड़ा घबराया हुआ था। साथ पढ़ने वाले आलोक पति त्रिपाठी बताते हैं कि सब ठीकठाक था, कभी नहीं लगा था कि ऐसा कदम उठा लेगा।
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बहन बोली-शव उतारने की इतनी क्या जल्दी थी
आदर्श की रोती-बिलखती बहन हस्मिता का कहना है कि बिना अभिभावक के शव उतारने की इतनी भी क्या जल्दी थी। भाई के शव को पुलिस ने उतार लिया, अस्पताल भी नहीं लें जाया गया। उसका मोबाइल, चार्जर और फोन का लीड भी नहीं मिला। परिजनों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंची आदर्श की मां दहाड़े मारकर रोने लगीं।