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Basti News: चेत रहे अफसर...अनदेखी ले रही मरीजों की जान

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बस्ती। इलाज में लापरवाही बरतने वाले निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग के अफसर मेहरबान हैं। जांच में दोषी ठहराए गए कई अस्पताल बेधड़क चल रहे हैं, बावजूद इसके अफसर आंख मूंदे हैं। बताते हैं कि घटना पर ही अधिकारी चेतते हैं, मगर तब तक देर हो चुकी होती है।
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सल्टौआ स्थित अस्पताल व कैली रोड स्थित हॉस्पिटल है। वहीं, ताजा मामला, मुंडेरवा का है। यहां भी लापरवाही के चलते मरीज की जान चली गई। लोहदर निवासी रोशनी (27) की मुंडेरवा स्थित अमृत हॉस्पिटल में मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। मामले में अस्पताल सील हो गया है। वहीं, संचालक मनीष श्रीवास्तव पर प्राथमिकी दर्ज है। यह तब हुआ जब पीड़ित मरीज से हाथ धो बैठा। अब पीड़ित सिस्टम से लड़ रहा है।
सीएमओ कार्यालय के पंजीकरण अभिलेख में अमृत अस्पताल का पंजीयन जिस डॉक्टर की डिग्री पर हुआ है वह एमबीबीएस डॉ. प्रतिभा शर्मा हैं। बताया गया कि घटना के वक्त अस्पताल पर इनकी मौजूदगी नहीं थी। सवाल उठ रहा है कि जिस चिकित्सक के नाम पर अस्पताल चल रहा है वह बिना डॉक्टर की मौजूदगी के कैसे संचालित होता रहा और बिना प्रशिक्षित डॉक्टर के नर्स ने इंजेक्शन लगा दी।
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इसके अलावा कैली रोड स्थित अस्पताल में बुजुर्ग की मौत प्रकरण में भी जांच पूरी नहीं हुई। अस्पताल संचालित होने लगा है, वहीं पीड़ित अब न्याय की आस छोड़ चुका है। पचपेड़िया रोड स्थित अस्पताल में भी दो माह पहले बुजुर्ग महिला की मृत्यु हुई थी। हंगामा हुआ। तहरीर पड़ी मगर, कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इससे पहले महिला अस्पताल के सामने गर्भवती की जान चली गई। दो माह तक जांच चली, अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला। अस्पताल धड़ल्ले से चल रहा है। सल्टौआ में भी बिना मानक संचालित अस्पताल सील हुआ, मगर बैकडोर से अस्पताल संचालित हो रहा है। ये अस्पताल सिर्फ नजीर हैं। ऐसे ही मानक विहीन संचालित अस्पताल पर अब विभाग सख्ती शुरू किया है।
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सरकारी अस्पतालों में भी लापरवाही उजागार
सीएचसी विक्रमजोत में नवजात मौत प्रकरण में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जांच लंबित बताया जा रहा है। हालांकि, एमओआईसी की ओर से बताया गया है कि नर्स पर एक वेतन का इंक्त्रीमेंट रोका गया है, मगर अभी तक नर्स पर अन्य कार्रवाई नहीं हुई है। इसी प्रकार खैड़ा उपकेंद्र पर भी नवजात की मृत्यु मामले में अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित फिर से गुहार लगा रहे हैं। कुदरहा सीएचसी नवजात मृत्यु प्रकरण में भी अभी तक मामला लटका हुआ है।
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कोट
मानक विहीन अस्पताल संचालित होते जो भी पाए जा रहे हैं कार्रवाई की जा रही है। नोडल अधिकारी को जांच के लिए भेजा जा रहा है।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
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