बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। घटते जलस्तर के साथ अब कटान का खतरा बढ़ने लगा है तो कई तटबंधों पर अब भी दबाव बना हुआ है। रविवार को केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सरयू का जलस्तर खतरे के निशान 92.73 मीटर से 13 सेंटीमीटर ऊपर 92.86 मीटर पर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में जलस्तर में करीब सात सेंटीमीटर की कमी आई है।
तटबंध और रामजानकी मार्ग के बीच बसे गांवों में अब भी पानी भरा है। ग्रामीण नाव और मोटरबोट के सहारे आवागमन कर रहे हैं। पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट है। चारा लेने के लिए उन्हें नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। बाढ़ के पानी से धान, गन्ना और सब्जियों समेत कई फसलें प्रभावित हुई हैं। ग्रामीणों को अब पानी घटने के बाद होने वाली कटान की चिंता सताने लगी है।
कटाव और बाढ़ के चलते कटरिया-चांदपुर, गौरा-सैफाबाद समेत तटबंधों पर नदी का दबाव बना हुआ है। सुविका बाबू, मैरुंड, भुवरिया, आशिक टेड़वा, श्रीराम पुरवा, अशोकपुर के कुछ मजरे, बरदिया लोहार का एक पुरवा, बिशुनपुर की अनुसूचित बस्ती और खजांचीपुर समेत कई मजरे बाढ़ की चपेट में हैं। टकटकवा गांव के पास बने रिंग बांध तक भी नदी का पानी पहुंच गया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों के अनुसार तटबंध सुरक्षित है।
गांवों में नहीं कम हुई परेशानी
दुबौलिया। सरयू का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की परेशानी बनी हुई है। पानी से घिरे गांवों में लोग नाव और मोटरबोट के सहारे रोजमर्रा के काम निपटा रहे हैं। जलस्तर कम होने के बाद कुछ स्थानों पर लोग पैदल भी आवागमन करते दिखे। पशुओं के लिए हरे चारे का संकट बना हुआ है। बाढ़ के कारण फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। परवल समेत सब्जियों की फसल बर्बाद होने से किसान चिंतित हैं।
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120 परिवारों को बांटी राहत सामग्री
बाढ़ से घिरे सुविका बाबू गांव के 120 परिवारों को रविवार को राहत सामग्री वितरित की गई। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर कटरिया गांव के पास प्रमुख विक्रमजोत केके सिंह और तहसीलदार शौकत अली की मौजूदगी में सामग्री बांटी गई। इस दौरान बब्लू सिंह, श्रीराम सिंह, प्रवीण कुमार, लेखपाल अजीत सिंह, राहुल सिंह और दीनदयाल श्रीवास्तव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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जलस्तर घटा तो कटान के खतरे से सहमे ग्रामीण
विक्रमजोत। सरयू का जलस्तर कम होने के बावजूद क्षेत्र के दर्जनों बाढ़ प्रभावित गांवों में संकट बरकरार है। गांवों के चारों ओर अब भी पानी भरा है। पकड़ी संग्राम, अर्जुनपुर, लकड़ी पांडेय, शंभूपुर और लकड़ी दूबे समेत कई गांवों में ग्रामीण बाढ़ से प्रभावित हैं। सैकड़ों बीघा फसलें पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी हैं। माझा क्षेत्र के कई पशुपालक मवेशियों के साथ तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। चारे के लिए उन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है। अब जलस्तर कम होने के साथ ग्रामीणों को कटान का डर सताने लगा है। उनका कहना है कि यदि कटान तेज हुआ तो खेतों और आबादी के लिए नया खतरा पैदा हो सकता है।
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आबादी की ओर बढ़ रही नदी, ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
कुदरहा। सरयू का जलस्तर कम होने के बाद भी तटवर्ती गांवों में कटान का खतरा बना हुआ है। महुआपार कला, बैडारी एहतमाली, मईपुर और टेंगरिहा राजा में नदी की तेज धारा ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी है। महुआपार कला के पास कटान बढ़ने से नदी रिहायशी क्षेत्र के करीब पहुंच गई है। कटान के चलते कई किसानों की कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। धान और गन्ने की खड़ी फसल भी प्रभावित हुई है। ग्रामीणों के अनुसार नदी की धारा लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है। इससे घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कटान के कारण गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से प्रभावित होने लगा है। बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने के लिए नदी किनारे मिट्टी से भरी बोरियां डाली जा रही हैं, लेकिन तेज बहाव के सामने यह इंतजाम नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीणों ने आबादी और कृषि भूमि को बचाने के लिए स्थायी कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है।
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कोट
जहां कटान की आशंका है, वहां बचाव कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। नदी का जलस्तर कम हुआ है। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है और निगरानी के लिए टीमें लगाई गई हैं।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड, बस्ती।