पीएचसी मुसहा : स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने से परेशानी
गौर (बस्ती )। सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवा एवं डॉक्टर होने का दावा किया जा है मगर हकीकत कुछ और है। मुसहा क्षेत्र की बीस हजार आबादी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित है। लेकिन, संसाधनों के अभाव में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत आधी आबादी यानी महिलाओं को हो रही है। क्योंकि इस पीएचसी में महिला चिकित्सक हैं और न ही कोई महिला पैरा मेडिकल स्टाफ।
26 अप्रैल 2019 को मॉडल के तौर पर चार बेड का पीएचसी मुसहा का शुभारंभ हुआ। तब स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी की अब जिला अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। सभी स्वास्थ्य सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मिलेंगी मगर ऐसा नहीं हुआ। अस्पताल का निर्माण लगभग चार वर्ष पूर्ण होने को है अभी तक किसी महिला स्टाफ, वार्ड ब्वाय और स्वीपर की तैनाती नहीं हुई और न ही पर्याप्त मात्रा में सुविधाएं दी गई हैं। अस्पताल परिसर में सफाई न होने से घास फूस उग गए हैं। अस्पताल से क्षेत्र के ग्राम सभा मुसहा, बेलसड़, ऐनपुर, मझौआ चौधरी, असनहरा, पोतनहरी, रेवटा, जगदीशपुर, पटखौली, कुर्दा, पेडरिया, भैंसाराजा, चुडिहारपुर, सूरबरवा, जलेबीगंज, पिपरकाजी सहित तमाम गांवों के लोगों का इलाज होता है। मगर सुविधाएं न होने से मरीजों को 20 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। मौजूदा समय में अस्पताल पर चिकित्साधिकारी डॉ. सुमित कुमार, आयुष चिकित्सक डॉ. नफीस, फार्मासिस्ट राम सुरेश वर्मा और लैब टेक्नीशियन सुरेंद्र सिंह की देखरेख अस्पताल संचालित हो रहा है। डॉ. नफीस ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते ओपीडी में मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत महिला स्टाफ न होने से महिला मरीजों को होती है। गर्भवती महिलाओं के इलाज व डिलीवरी के लिए सीएचसी गौर या जिला अस्पताल रेफर करना मजबूरी रहता है।
इनकी सुनें
भैंसा राजा गांव के फूलचंद यादव ने बताया कि न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुसहा पर जो सुविधाएं मरीजों को मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पा रही है। बताया कि यहां के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
कलिगडा गांव के प्रधान आदित्य कुमार वर्मा कहते हैं कि अस्पताल पर महिला चिकित्सक के न होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिला मरीजों को उठानी पड़ती है। पीएचसी पर जो सुविधाएं मरीजों के लिए होनी चाहिए वह नहीं है।
इसी गांव के पंकज चौधरी कहते हैं कि पीएचसी पर समुचित मात्रा में सुविधाएं न होने से मरीजों को बाहर से इलाज कराना मजबूरी है। अस्पताल पर जांच की सुविधा न होने से मरीजों को काफी दिक्कत उठानी पड़ती है।
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बेहतर की जाएगी स्वास्थ्य सेवा
सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे हैं। जिले के ग्रामीण इलाके में स्थिति अस्पतालों की समस्याओं को सूचीबद्ध कर आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। यहां महिला पैरा मेडिकल्स की तैनाती के लिए व्यवस्था बनाई जा रही है।