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आजादी के बाद दो चुनावों में एक भी वोट नहीं हुआ था अवैध

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आजादी के बाद दो चुनावों में एक भी वोट नहीं हुआ था अवैध
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- 1962 के आम चुनाव में पहली बार अस्तित्व में आया था अवैध मत
नगर बाजार (बस्ती)। आजादी के बाद दो विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग ने एक भी वोट को अवैध नहीं माना था। आयोग ने मतों की गिनती के बाद नतीजों को घोषित किया था। 1962 के विधानसभा चुनाव से मतगणना के दौरान अवैध मतों को अस्तित्व में लाया गया।
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मतदाता पहले भी मतदान करने के लिए उत्साहित रहते थे। लेकिन, शुरुआत के लगातार दो चुनावों में सभी मतों को वैध माना जाता रहा। 1951 में जब पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ तो बस्ती पूरब सुरक्षित (वर्तमान में महादेवा) सीट पर पांच प्रत्याशियों के बीच कुल 29 हजार 225 मत पड़े। इसी प्रकार हर्रैया पूरब/बस्ती पश्चिम (वर्तमान में हर्रैया) में 93 हजार 794 मत, डुमरियागंज (नार्थ वेस्ट) में 32 हजार 893 मत, डुमरियागंज (नार्थ ईस्ट) में 38 हजार 848 मत, बांसी साउथ में 38 हजार 338 मत, बांसी उत्तरी में 1 लाख 18 हजार 717 मत, बस्ती पश्चिम में 95 हजार 174 मत, डुमरियागंज पश्चिम में 26 हजार 102 मत, डुमरियागंज उत्तरी में 34 हजार 649 मत, हर्रैया उत्तर पश्चिम सुरक्षित में 21 हजार 239 मत, हर्रैया दक्षिण पश्चिम में 16 हजार 371 मत, खलीलाबाद दक्षिणी में 83 हजार 852 मत, खलीलाबाद उत्तरी में 19 हजार 617 मत डाले गए थे। निर्वाचन आयोग ने इन सभी मतों को वैध घोषित किया था। इसके बाद जब 1957 में विधानसभा चुनाव हुआ तो फिर सभी मतों को वैध माना गया। लेकिन, मतगणना के दौरान प्रत्याशियों व गणना अभिकर्ताओं ने अवैध मतों को चुनौती देना शुरू कर दिया। ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेकर निर्वाचन आयोग ने 1962 के विधानसभा चुनाव में मतगणना के दौरान गलत मतों को अवैध घोषित करने की व्यवस्था बना दी।
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