ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जीने वाले निलंबित नायब तहसीलदार ने कभी सोचा भी नहीं रहा होगा कि 13 डिग्री सेल्सियस तापमान में दरी पर लेटकर रात गुजारनी पड़ेगी। जिस सरकारी कंबल को देखकर नाक-भौं सिकोड़ते थे, अब वही सहारा है। तीन दिन पहले मिलने आए भाई ने चद्दर और कुछ कपड़े दे दिए थे। मगर, बढ़ती ठंड में वे नाकाफी बताए जा रहे हैं। इधर दो दिन से कोई मिलने भी नहीं आया। 10 दिन तक मुलाहिजा बैरक में क्वारंटीन रखा जाएगा।
प्रभारी जेल अधीक्षक अपूर्वव्रत पाठक ने बताया कि मंगलवार को विचाराधीन बंदी घनश्याम शुक्ल के भाई और अधिवक्ता मिलने आए थे। इसके बाद बुधवार और बृहस्पतिवार को कोई मुलाकाती नहीं आया। बंदी को बैरक नंबर नौ मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। उस बैरक में 18 अन्य बंदी भी हैं। यह एक तरह की क्वारंटीन बैरक है, जहां बाहर से आने वाले नए बंदियों काे 10 दिन तक रखा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उनके अंदर संक्रामक बीमारी या वैक्टीरिया हो तो उनका असर बाकी बंदियों में न फैले। 10 दिन बीतने के बाद दूसरी बैरक आवंटित कर दी जाएगी।
तालमेल बैठाने की कोशिश
आरोपी घनश्याम जेल की आब-ओ-हवा से तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बंदियों ने दूरी बना रखी है। जेल के सूत्रों के मुताबिक बैरक नंबर नौ में रखे गए करीब 18 बंदियों में किसी से भी घुल-मिलकर बात करते नहीं देखा गया। ज्यादातर समय बैरक में लेटकर बिताते देखा जा रहा है।
सोमवार को जेल भेजा गया था घनश्याम
महिला अधिकारी से दुष्कर्म की कोशिश, हत्या के प्रयास समेत अन्य आरोपों में दर्ज केस में निलंबित नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ला को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया था। आरोपी को पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मंगलवार को न्यायालय में जमानती की अर्जी दी गई थी, लेकिन न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया था। न्यायालय ने रिमांड की अवधि पूरी होने पर आठ दिसंबर को फिर तलब किया है।