कंपनी बाग शिव मंदिर पर नागपंचमी पर दूध चढ़ाते श्रद्घालु।
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उल्लास के साथ मनाई गई नागपंचमी
बस्ती। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी अर्थात नागपंचमी जिले भर में परंपरा, श्रद्धा और विश्वास के साथ रविवार को मनाई गई। दूध दही और शहद से मंदिरों में नाग देवता का अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और नाग देवता दोनो की आराधना की।
जगह-जगह कुश्ती, कबड्डी और अन्य खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कई जगहों पर आल्हा का गायन भी हुआ। गांवों में घर की महिलाओं ने दीवारों पर सांप की आकृति बनाकर पूजा की तो कुछ लोगों ने मंदिरों में जाकर शिव के गले का हार नाग देवता की विधि विधान से पूजा अर्चना की। वहीं कुछ लोगों ने नागों को दूध पिलाकर उनका दर्शन लाभ किया। नागपंचमी पर एक ओर जहां परिवार के बड़े सदस्यों ने नाग देवता की पूजा आराधना की वहीं छोटे बच्चों ने ताल, पोखरों, नदी आदि के किनारे जाकर बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गुड़िया पीटकर नागपंचमी का पर्व मनाया। गुड़िया पीटने वाले स्थानों पर तमाम दुकानें लगी थी जिन पर मिठाई, चाट पकौड़े, खिलौने आदि बेचे जा रहे थे। बस्ती शहर में कटेश्वर पार्क, मूड़घाट, भुजैनिया पोखरा आदि स्थानों पर मेले लगे। ज्योतिषाचार्य सतीश मणि त्रिपाठी के मुताबिक नागपंचमी के दिन स्नान करके घर के दरवाजे या पूजा स्थल पर नाग की आकृति बनाकर पूजन का विधान है। कुछ जगह गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर पांच फन वाले नागदेव की आकृति बनाकर पूजा की गई। पूजन में ‘नागराजाय नम:’ मंत्र का उच्चारण किया गया। नागदेव को दूध, खीर, पुष्प आदि चढ़ाए गए। महिलाएं और लड़कियां गुड़िया बनाकर भाई के साथ तालाब पर गईं। वहां पानी में गुड़िया डालने के बाद भाई उसे बेर की लकड़ी से पीटे। इसके बाद चने और गुण का प्रसाद बांटा गया। कुछ स्थानों पर महिलाओं ने कजरी और सावन का गीत गाते हुए झूले का आनंद उठाया।