बस्ती। नाला-नालियों में गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप तेज हो गया है। शहर के सभी वार्डों में नगर पालिका खूब कवायद कर रही है, मगर इसका कोई असर मच्छरों पर नहीं है। यह अलग बात है कि वर्ष भर में मच्छर औसतन 10 लाख की दवा पी गए, मगर परिणाम आज भी शून्य है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में जेई-एईएस के लिए जिला संवेदनशील है। शहर में भी इस रोग से तमाम लोग बीमार हो चुके हैं। शासन इसे लेकर गंभीर है और शहर से लेकर गांवों तक व्यवस्था बनाने के लिए छिड़काव व शुद्ध पानी की व्यवस्था का निर्देश शासन ने दिया था। इस क्रम में शहरी क्षेत्र में नगर पालिका को जिम्मेदारी मिली है कि मच्छरों से निजात के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव व फॉगिंग कराया जाए।
इसी निर्देश के क्रम में 25 वार्ड में कई चरणों में मैलाथियान के साथ डीजल व पेट्रोल मिलाकर नगर पालिका ने फॉगिंग कराई और नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ। बावजूद इसके शहर में मच्छरों का घनत्व तेजी से बढ़ रहा है। इस अभियान पर वर्ष भर में औसतन करीब दस लाख नगर पालिका ने धुएं में उड़ा दिया, मगर एक भी मच्छर नहीं मरे। यह अलग बात है कि इस माह में 21 जून से चले अभियान में निगम दावा कर रहा है कि अब तक शहर के कटरा, पांडेय बाजार, पुराना डाकखाना, सुर्तीहट्टा, महरीखावां, नरहरिया वार्डों में फॉगिंग कराई जा चुकी है। शेष में भी यह क्रम जारी रहेगा। इससे पहले मार्च माह में भी नगर पालिका ने फॉगिंग व छिड़काव करवाया था, मगर परिणाम जस का तस है। फॉगिंग व छिड़काव का कहीं कोई असर नजर नहीं आ रहा है।
शहर के रोडवेज निवासी गृहिणी शादिया काजी कहती हैं कि नगर पालिका का फॉगिंग केवल कागजी है। मच्छर मरना तो दूर भागते तक नहीं। न जाने कौन सी दवा से धुआं किया जाता है। एंटीलार्वा का छिड़काव केवल कागजों में ही होता है। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष रूपम मिश्रा ने कहा कि फॉगिंग से मच्छर नहीं मरने की शिकायत संज्ञान में है। इसके लिए एंटी लार्वा का भी छिड़काव कराया जा रहा है। फॉगिंग में दवाओं के प्रयोग के लिए तकनीकी सलाहकारों से बातचीत कर उसे और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
शहर के तुरकहिया निवासी डा. तैय्यब कहते हैं कि सब कुछ यहां कागजों में हो रहा है। फॉगिंग व छिड़काव भी इसी का हिस्सा है। न तो कहीं मच्छर कम हो रहे हैं और न इसका कोई असर उन पर नजर आता है।
गांधी नगर निवासी शिवम शुक्ल कहते हैं कि नगर पालिका का अभियान केवल दिखावा है। सरकारी धन को खर्च करने का यह भी एक रास्ता पालिका ने बना रखा है। एक भी मच्छर नहीं मरते यह पालिका के लोग भी जानते हैं, मगर फॉगिंग कराने की औपचारिकता में लगे रहते हैं।
पुरानी बस्ती की निवासी कला अग्रवाल कहती हैं कि मच्छरों से निपटने के लिए पालिका के पास कोई कारगर उपाय नहीं है। वही पुराने ढर्रे पर फॉगिंग व छिड़काव से कुछ होने वाला नहीं है। मच्छरों से बचाव के लिए पालिका को नए सिरे से कोई उपाय करना चाहिए। केवल धन का अपव्यय न हो। परिणाम भी मिले।