फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिर भटका मानसून,अच्छी बारिश का अब तक इंतजार

विज्ञापन
विज्ञापन
मानसून ने दिया गच्चा, मौसम गर्म
विज्ञापन

बस्ती। मानसून की बेरुखी से एक बार फिर मौसम का मिजाज गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि मानसून के भटकने से जहां बारिश का सिस्टम नहीं बन पा रहा है वहीं, मौसम में जबरदस्त उमस भरी गर्मी होने से जनजीवन बेहाल हो गया है। वहीं, जिले के किसान मौसम के गर्म मिजाज से काफी चिंतित व निराश हैं। सोमवार को अधिकतम पारा 37 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया जबकि वातावरण में 70 फीसदी आर्द्रता दर्ज की गई। वहीं, मौसम विज्ञानी बताते हैं कि सप्ताह के अंत तक अच्छी बारिश का सिस्टम बनने का अनुमान है जबकि अगले चार-पांच दिनों तक मौसम शुष्क बना रह सकता है।
मानसून के इस रुख से जहां एक ओर मौसम विज्ञानी हैरान हैं वहीं किसानों में भारी निराशा है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के दिशा बदलने के कारण बारिश में कमी आ रही है। उम्मीद है कि इस सप्ताह के अंत तक अच्छी बारिश का सिस्टम बनकर तैयार हो जाएगा। जिससे सारी कसर पूरी हो जाएगी। करीब एक पखवाड़ा देर से पहुंचे मानसून के गति न पकड़ने से खरीफ फसलों को भारी नुकसान की आशंका है। जानकारों का कहना है कि इससे धान की फसल में लागत तो बढ़ेगी ही, उत्पादन पर भी विपरीत असर पड़ेगा। आंकड़ों की बात करें तो बस्ती मंडल के तीनों जिले में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 49 फीसदी कम बारिश हुई। पिछले वर्ष 2021 जून के अंतिम सप्ताह में 70 मिलीमीटर, 2020 में 85 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। 2021 की जुलाई के शुरुआती चार दिनों में 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई थी। जिसके कारण खेत-तालाब लबालब भर गए थे। इससे धान की रोपाई में काफी सुविधा हुई थी। गर्मी भी काफी हद तक काबू में आ चुकी थी। मगर इस बार जुलाई में अभी सिर्फ 32 मिलीमीटर बारिश ही हुई।
विज्ञापन

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि अभी चार-पांच दिन मौसम शुष्क बना रह सकता है। आसमान में हल्के बादल तो दिखेंगे लेकिन बारिश की संभावना सिर्फ 20 फीसदी है। इस दौरान सामान्य गति से पुरवा हवाएं चलने का अनुमान है।
विज्ञापन

---
दो पीपी
कम बारिश से घट जाएगा धान का रकबा
जिले में इस वर्ष एक लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबा में धान की खेती की जानी है। जिसके सापेक्ष अभी अनुमानत: 10 प्रतिशत ही रोपाई हो पाई है। कृषि विभाग के मुताबिक धान की रोपाई का यही सबसे मध्य का समय चल रहा है। साऊंघाट विकास खंड के करही गांव के विश्वपाल का कहना है कि इस बार बारिश का रुख निराश करने वाला है। गौर विकास खंड के इटवा निवासी ब्रजेंद्र कुमार का कहना है कि उनकी करीब 35 बीघे धान की खेती करने का लक्ष्य था लेकिन मौसम को देखते हुए हिम्मत नहीं हो रही है। पोखरनी निवासी परदेशी शर्मा कहते हैं कि इसी हफ्ते अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान का रकबा कम करना पड़ेगा।
-----
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें