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विसर्जन : डीजे के शोर से दहलता रहा इलाका, उड़ गई रात की नींद

Wed, 08 Oct 2025 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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विसर्जन जुलूस में खुलकर बजे डीजे- संवाद
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बस्ती। आस्था की लहर में नियम के सारे बंधन टूट गए। विसर्जन यात्रा शुरू हुई तो उछल-कूद, नाचना, थिरकना, शोर-शराबा थमने का नाम नहीं लिया। देवी प्रतिमाओं के साथ चल रहे डीजे वाहनों से निकल रही तेज ध्वनि से इलाका दहल उठा। आसपास के घराें के खिड़की, दरवाजे उच्च आवृत्ति वाले ध्वनि से हिलने लगे। लोग नजारा देखने के लिए घरों से बाहर आ गए। छतों की रेलिंग से लेकर सड़क के किनारे तक भीड़ ही भीड़ दिख रही थी।
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शाम ढलने के बाद बड़े वाहनों पर लदी देवी की दिव्य प्रतिमाओं की विदाई यात्रा प्रारंभ हुई तो श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जिधर देखो उधर देवी भक्तों का अपार समूह। उत्साह, माधुर्य, भावुकता, श्रद्धा, उल्लास, भक्ति का ऐसा विहंगम दृश्य कि हर कोई अपने को जोड़ते चला गया। कतारबद्ध चाल, कम ध्वनि वाले डीजे जैसे नियम-कानून सब टूटते चले गए। देवी भक्तों के उत्साह के आगे किसी की नहीं चली। देवी प्रतिमाओं के साथ उच्च आवृत्ति वाले ध्वनि में डीजे से फिल्मी धुनों पर देवी गीतों की गूंज होती रही।
माइक से गगनभेदी उद्घोष करते हुए पूजा कमेटियां अपने साथ आए श्रद्धालुओं को लेकर आगे बढ़ रही थी। देवी के जयकारों से जहां गूंजने लगा। डीजे की कर्कश आवाज किसी से सही गई तो कोई असहज होने लगा। फिर भी देवी की भक्ति के आगे विनम्र भाव लोगों में बना रहा। बुजुर्ग एवं बीमार को शोर-शराबे से विचलित हुए तो मुक्त कंठ से जय माता दी कहते हुए घरों के कोने में जाकर दुबक गए।
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हालांकि, कुछ समझदार चर्चा के दौरान यह नसीहत जरूरत दे रहे थे कि आयोजन तो ठीक हैं लेकिन, शोर-शराबा थोड़ा संयमित होना चाहिए, जिससे बुजुर्ग, बच्चों और बीमारों की सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े। लेकन, भक्ति के जोश में होश खोए युवाओं को इसकी परवाह कहां। डीजे की फुल म्यूजिक ही तो उनके आनंद का उत्कर्ष बन गया था। नाचना, उछलना, करतब दिखाने का सिलसिला रास्ते भर चला।
वाहनों पर सजाए गए लाइट की रोशनी से दूर तक प्रकाश की जगमगाहट हो रही थी। युवा टोली माता की लाल चुनरी माथे पर बांधकर उछलते हुए चल रही थी।
बीच- बीच में देवी के जोर के जयकारों का उद्घोष भी होता रहा। ध्वनि की अधिक तीव्रता के चलते हृदय रोगियों का दिल दहल उठा। लोग हाथ से कलेजा थामे देवी की विदाई को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देना चाह रहे थे।
यह नजारा शहर और आसपास पांच किमी के दायरे में चौतरफा बनी रही। प्लास्टिक कांपलेक्स, पांडेय बाजार, सोनूपार, मनौरी, हरदिया, बड़ेवन, मालवीय मार्ग, सुर्तीहट्टा, अस्पताल चौराहा, रोडवेज, गांधीनगर, कंपनीबाग से लेकर अमहट तक विदाई यात्रा का तारतम्य टूटने का नाम नहीं लिया।

विसर्जन जुलूस में खुलकर बजे डीजे- संवाद

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