बस्ती। नवरात्र से लेकर 15 दिन तक चलने वाले दुर्गा पूजा समारोह का समापन मंगलवार को हुआ। शहर में नवरात्र की सप्तमी से शुरू उत्सव का समापन पूर्णिमा को किया गया। शाम ढलने के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन की गहमागहमी शुरू हो गई। अमहट घाट पर रात दस बजते ही प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हुआ तो यह सिलसिला थमने का नाम नहीं लिया।
रात आठ बजे के बाद दुर्गा पंडालों से वाहनों पर पूरे साज-सज्जा के साथ प्रतिमाओं को लेकर आयोजन समितियां विसर्जन के लिए निकलीं तो मूर्तियों की संख्या बढ़ती गई। प्रशासन के आंकड़े के मुताबिक शहरी क्षेत्र में 370 प्रतिमाएं स्थापित थीं। लेकिन, विसर्जन स्थल पर यह आंकड़ा डेढ़ गुना से अधिक निकला। लगभग 1800 प्रतिमाओं का विसर्जन कराने में मशक्कत करनी पड़ी। माता रानी को अटूट श्रद्धा के साथ विदाई देने की होड़ मची रही।
रात आठ बजे के समूचा शहर देवी प्रतिमाओं के जुलूस से भर गया। देवी के जयकारे और हर-हर महादेव, जय श्री राम जैसे उद्घोष के बीच श्रद्धालु उछलते-कूदते आगे बढ़ रहे थे। धीरे-धीरे विभिन्न मार्गों से प्रतिमाओं को निर्धारित रूट गांधीनगर मार्ग पर लाया गया।
रात नौ बजे के बाद रोडवेज से लेकर अमहट घाट तक पांच किमी की दूरी में प्रतिमाएं कतारबद्ध दिखने लगीं। अमहट घाट पर जैसे- जैसे विसर्जन होता गया गाड़ियां आगे बढ़ती गई। विसर्जन मार्ग पर पूरी रात श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी माता रानी से सुख, समृद्धि, शुभ, मंगल की कामना करते हुए उन्हें नम आंखों से विदाई दी।
शहर में मेले का आनंद लेते लोग- संवाद
शहर में मेले का आनंद लेते लोग- संवाद
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शहर में मेले का आनंद लेते लोग- संवाद
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