अधिशासी अभियंता प्रथम पर वित्तीय अनियमितता के आरोप, जांच के निर्देश
बस्ती। विद्युत वितरण खंड प्रथम अधिशासी अभियंता संतोष कुमार पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। पावर कारपोरेशन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अधिशासी अभियंता पर आरोप है कि बिजली चोरी के प्रकरण में राजस्व निर्धारण पहले लाखों में बनाया जाता है। फिर बिना सही तथ्यों के उसी राजस्व निर्धारण को कम करके उपभोक्ताओं से धन उगाही की जाती है। पावर कारपोरेशन ने आठ ऐसे मामलों का पत्र में जिक्र किया है, जिसमें राजस्व निर्धारण कम किया गया है।
पत्र के अनुसार पिकौरा दत्तु राय, बेलवाडाड़ी, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, लौकिहवा, आवास विकास कॉलोनी और चिसईया पुरानी बस्ती में दो उपभोक्ताओं का राजस्व निर्धारण कम किया गया है। इन सातों बिजली चोरी के मामलों में पहले करीब तेरह लाख 91 हजार 513 रुपयों का राजस्व निर्धारण किया गया। आरोपों के अनुसार अधिशासी अभियंता ने मनमाने तरीके से इसे कम करते हुए महज तीन लाख 66 हजार 826 रुपये ही राजस्व के रूप में विद्युत निगम में जमा कराए। इस प्रकार विद्युत निगम को दस लाख 24 हजार 687 रुपयों के राजस्व की क्षति हुई। ऐसे ही उनके द्वारा फर्जी बिल रिवीजन करके निगम को राजस्व हानि पहुंचाया गया है। एक 15 किलोवाट के कनेक्शन पर दिसंबर 2019 में तीन लाख रुपये का बकाया चल रहा था। लेकिन, अधिशासी अभियंता ने गलत तरीके से बिल की धनराशि कम करके एक लाख रुपये कर दिया।
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लेनी होती है अधीक्षण अभियंता से अनुमति
विद्युत निगम के जानकार बताते हैं कि बिजली चोरी के मामले में एक बार राजस्व निर्धारण हो जाने के बाद इसे बदला नहीं जा सकता है। विषम परिस्थितियों में यदि ऐसा करने की जरूरत पड़ी तो पहले अधीक्षण अभियंता से अनुमति लेनी होती है। इसके बाद संबंधित क्षेत्र के अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर अधिशासी अभियंता दोबारा राजस्व निर्धारण कर सकते हैं। उक्त आठों मामलों में नियमों को ताक पर रखकर राजस्व निर्धारण कम किया गया है।
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अधिशासी अभियंता की जांच कराने का अधिकार डिस्कॉम को
विद्युत वितरण निगम के मुख्य अभियंता एमके अग्रवाल ने कहा कि अधिशासी अभियंता की जांच कराने का अधिकार डिस्कॉम को है। पावर कारपोरेशन से मिली शिकायत डिस्कॉम को भेजी गई है। इस मामले की जांच डिस्कॉम स्तर से की जानी है।