बीमारी से निपटने को गांव में उतरेगा स्वास्थ्य विभाग
बस्ती। जेई/एईएस के लिए जिला अति संवेदनशील की श्रेणी में है। वर्ष 2012 में मस्तिष्क ज्वर के चलते जिले में तमाम बच्चे बीमार हुए थे। कुछ की मौत भी हो गई थी। इसके बाद अप्रैल से लेकर जून तक जिले में शासन के निर्देश पर संचारी रोग नियंत्रण अभियान व दस्तक कार्यक्रम संचालित होता है। इस बार भी ये दोनों अभियान चलाए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत गांवों में स्वास्थ्य विभाग बीमारी से जंग लड़ने 12 विभागों के साथ उतरा है।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान की कड़ी में जेई/एईएस को लेकर संवेदनशीलता एक बार फिर बढ़ गई है। विकास विभाग, नगर निकायों व प्रशासनिक तंत्र के सहयोग से अभियान को स्वच्छता, जागरूकता एवं टीकाकरण के रास्ते संचारी रोग से जंग का दावा स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। गांवों की गलियों में पहुंचने के लिए सीएचसी पीएचसी के माध्यम से टीम को लगाया गया है वहीं ब्लॉकों व ग्राम पंचायतों ने भी स्वच्छता व छिड़काव आदि की कमान संभाली है। जिले में दस संवेदनशील गांवों में टीम विशेष नजर रखेगी। यहां एंटी लार्वा का छिड़काव व अन्य निरोधात्मक कार्रवाई की जा चुकी है मगर स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग लगातार नजर बनाए हुए है।
यह दस गांव संवेदनशील सूची में
सल्टौआ ब्लॉक के देईपार, बनकटी के खोरिया बाजार, भानपुर के उमरिया पश्चिम, कुदरहा के गायघाट व बानपुर, सदर के डारीडीहा व महसों, रुधौली के रौना कला तथा शहर के पुरानी बस्ती में पठान टोला संवेदनशील सूची में शामिल हैं।
बोले, सीएमओ
सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान जेई/एईएस से निपटने में सहायक है। इसी अभियान के चलते जागरूकता बढ़ी है। दस संवेदनशील गांवों में हर साल मरीज मिलते हैं, मगर इस साल अभी यहां एक भी मरीज नहीं आए हैं। इन गांवों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार नजर बनाए हुए हैं। इन गांवों में टीम के साथ दौरा कर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। अब तक दो गांवों के हालत को देखा जा चुका है। वहां ग्रामीणों से घर के आसपास गंदगी न जमा होने तथा झाड़-झंखाड़ साफ करने को कहा गया है। वैसे विकास विभाग की टीम कार्रवाई कर रही है।