दो फर्जी काॅलेज संचालकों समेत 11 आरोपियों पर हो चुकी है कार्रवाई
500 छात्रों की शिकायत के बाद शुरू हुई थी एसआईटी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सावित्री पैरामेडिकल कॉलेज में डीफार्मा के नाम पर फर्जी तरीके से प्रवेश और कूटरचित सर्टिफिकेट के आधार पर फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) में पंजीकरण कराने का मामला बसती के लिए नया नहीं है। फर्जी पैरामेडिकल कॉलेज में प्रवेश के नाम पर पहले भी छात्रों के साथ धोखाधड़ी हो चुकी है। दो फर्जी कॉलेज संचालित करने में संचालक समेत 11 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं और उन पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी हो चुकी है।
आईजी आरके भारद्वाज से बी-फार्मा, डी-फार्मा के विद्यार्थियों व अभिभावकों ने मिलकर अपनी समस्याओं को रखा। इसे गंभीरता से लेते हुए आईजी ने एसआईटी के गठन का आदेश जारी किया। एसआईटी की जांच में परत-दर-परत ऐसे खुलासे हुए, जिसमें पता चला कि एक संगठित गिरोह की तरह यहां विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।
सदर कोतवाली क्षेत्र में सरदार पटेल हॉस्पिटल एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में कोर्स कर रहे 500 से अधिक छात्र छात्राओं ने डीएम को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। कोतवाली में तहरीर के बाद पुलिस इस मामले की छानबीन शुरू की। 2020-2021 में बस्ती कोतवाली क्षेत्र में हर्दिया चौराहे के पास स्थित सरदार पटेल हॉस्पिटल एंड पैरामेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। आरोप है कि तीन साल पढ़ने के बाद फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर की मार्कशीट नहीं दी गई।
छात्रावास से निकलने के कुछ महीने बाद सभी बच्चे अपना पैसा वापस मांगने लगे। तब दाखिला देने वालों ने टाइम मांगा। इसके बाद बिना पूछे उनका दाखिला आगरा के किसी कॉलेज में करवा दिया, लेकिन वहां भी फीस जमा नहीं की गई। इस पर कहा गया कि फीस जमा करिए नहीं तो आप कहीं भी दो साल दाखिला नहीं ले पाएंगे। कॉलेज में दाखिला लेने वाली छात्राओं ने बताया कि उन्हें झांसा दिया गया कि आंध्र प्रदेश के किसी यूनिवर्सिटी में आप लोगों का एडमिशन करवाया जाएगा।
इस आधार पर सभी से फीस के नाम पर एक से डेढ़ लाख वसूले गए, मगर फीस जमा नहीं की गई। एग्जाम कराया गया तो उसकी कॉपी भी कूड़े में दान में मिलीं । कुछ छात्रों को डिग्री दी गई तो वह भी फर्जी निकली। वहीं एक छात्र को तो एक ही कोर्स की दो अलग अलग इंस्टीट्यूट की फर्जी डिग्री दे दी गईं। जिन क्लास में उन्हें पढ़ाया जाता रहा वह भी फर्जी निकले, और तो और जो टीचर बनकर पढ़ाने आते थे वह भी फर्जी निकले।