बस्ती। जिला अस्पताल में प्राइवेट वार्ड की कमी से मरीजों और तीमारदारों को होने वाली परेशानी जल्द दूर होने की उम्मीद है। अस्पताल में पांच नए प्राइवेट वार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए भूमि चिन्हांकन का काम शुरू हो गया है। नए वार्ड बनने के बाद प्राइवेट कक्ष के लिए मरीजों और तीमारदारों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जिला अस्पताल में वर्तमान में स्थायी रूप से केवल चार प्राइवेट वार्ड उपलब्ध हैं। मरीजों की संख्या के मुकाबले वार्ड कम होने के कारण भर्ती के लिए अक्सर मारामारी की स्थिति रहती है। जरूरत के समय प्राइवेट वार्ड उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों के परिजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर सीजर के बाद मरीज को आराम और देखभाल की जरूरत होने के कारण तीमारदार प्राइवेट वार्ड के लिए अधिक परेशान रहते हैं।
प्राइवेट वार्ड की कमी को देखते हुए अस्पताल में बर्न वार्ड का भी वैकल्पिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद मरीजों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। महिला मरीजों के लिए भी प्राइवेट वार्ड की कमी बनी हुई है। ऐसे में पांच नए प्राइवेट वार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने से मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
मरीज रिंकी को पथरी का ऑपरेशन कराना था। उन्होंने प्राइवेट वार्ड के लिए आवेदन किया लेकिन वार्ड खाली नहीं होने के कारण उन्हें मजबूर होकर सामान्य वार्ड में रहना पड़ा। इसी तरह अमित को भी प्राइवेट वार्ड की जरूरत थी, लेकिन उपलब्धता नहीं होने के कारण उन्हें सामान्य वार्ड में ही भर्ती होना पड़ा। जिला अस्पताल में आर्थोपेडिक, जनरल सर्जरी समेत अन्य मरीजों की सर्जरी होती है। प्राइवेट वार्ड के लिए मरीज से दो हजार रुपये जमा कराए जाते हैं। जिला महिला अस्पताल में भी प्राइवेट वार्ड की कमी बनी हुई है।
वेटिंग लिस्ट से मिलेगी राहत
प्राइवेट वार्ड की संख्या कम होने के कारण मरीजों को कई बार कक्ष खाली होने का इंतजार करना पड़ता है। नए वार्ड बनने के बाद प्राइवेट कक्षों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे जरूरत के समय मरीजों को वार्ड उपलब्ध कराने में सहूलियत होगी और वेटिंग लिस्ट का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। इसके लिए निर्माण इकाई की ओर से सर्वे किया जा रहा है।
अस्पताल में पांच नए प्राइवेट वार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नए वार्ड बनने के बाद प्राइवेट वार्ड की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।
डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती