पिता ने छोड़ा साथ, मां ने अंडे बेच बेटी को बनाया राष्ट्रीय खिलाड़ी
बस्ती। ढाई दशक पहले पति ने तरीबुन्निशा को तलाक दिया तो सिर पर छत तक नहीं थी। उन पर चार-चार बेटियों की जिम्मेदारी का बोझ आ गया। इस मुश्किल घड़ी में हिम्मत हारने के बजाय तरीबुन्निशा खुद ही मेहनत कर बेटियों की किस्मत संवारने में जुट गईं। तीन बेटियों की शादी कर दी और चौथी बेटी हिना को राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना दिया। मां की मेहनत से हिना अब आसमान छू रही है।
अब तक चार बार राष्ट्रीय टीम में खेल चुकी हिना इस वर्ष हैंडबॉल की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हैदराबाद में अपने हुनर का प्रदर्शन किया है। इन दिनों वह अवध यूनिवर्सिटी से एमपी एड (मास्टर आफ फिजीकल एजूकेशन) कर रही हैं। उनकी इच्छा पुलिस अफसर बनकर देश सेवा की है।
पचीस वर्ष पहले हिना की मां तरीबुन्निशा को पति ने तलाक दे दिया। अचानक घर से वह सड़क पर आ गई। बेटियों को लेकर तरीबुन्निशा को हाईवे किनारे पॉलीटेक्निक चौराहे पर थोड़ी सी जमीन में टिन शेड डालकर छत कर इंतजाम कर लिया। अब उसके सामने पेट पालने का संकट खड़ा था, मगर उसने हार नहीं मानी। इधर उधर से कुछ धन का इंतजाम कर वह छोटी सी अंडे की दुकान लगा ली। इसके बदौलत उसके घर का खर्च चलने लगा, मगर पढ़ाई- लिखाई के लिए धन की जरूरत को पूरा करने के लिए वह आसपास के घरों में चौका- बर्तन करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे समय बीता तो बेटियां बड़ी हो गईं। इसके बाद तरीबुन्निशा ने तीन बेटियों हसीना, जरीना व शारजहां की शादी कर दी। चौथी बेटी हिना छोटी थी, मगर उसकी रुचि खेल में थी। इसे देख मां ने उसको प्रोत्साहित किया। कई बार धन के चलते बाहर जाने में हिना को परेशानी भी हुई, मगर मां का हौसला दिक्कतों पर भारी पड़ा।
प्रदेश स्तरीय टीम से करीब आठ प्रतियोगिताएं खेल चुकीं हिना को पहली बार वर्ष 2016 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला। तब से लेकर अब तक वह चार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शिरकत कर अपनी प्रतिभा का दम दिखा चुकी है। मां तरीबुन्निशा बेटी की उपलब्धि पर फूले नहीं समातीं। कहती हैं कि बेटी एक दिन दुनिया भर में नाम कमाएगी। खेल उसकी जिंदगी है तो उसको मुकाम दिलाने के लिए चाहे जो करना पड़े करुंगी।