बस्ती। शहर की दूसरी व्यस्ततम सड़क मालवीय मार्ग अतिक्रमण के चलते सिकुड़ गई है। उस पर डिवाइडर निर्माण ने बची-खुची चौड़ाई को भी लील लिया। अब इस मार्ग पर विद्युत खंभे व डिवाइडर के बीच सड़क संकरी हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। इन स्थितियों के चलते नागरिक यह सवाल उठाने लगे हैं कि सड़क व नाला को व्यवस्थित कराए बगैर पालिका प्रशासन ने डिवाइडर का निर्माण क्यों करा दिया। नेहरू तिराहे से मालवीय मार्ग सुभाष चौक तक करीब तीन किमी है। इस मार्ग पर सड़क की पटरियां अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी हैं। हालांकि, तमाम प्रयास हुए जरूर मगर अतिक्रमण हटाने की सारी कवायद केवल कागजी रह गई।
बात नेहरू तिराहे से शुरू करते हैं। यहां एक पटरी पर अवैध टैक्सी स्टैंड का कब्जा है तो दूसरी पटरी पर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। यहां दिन भर नागरिक जाम झेलते हैं। इस मार्ग पर आगे व्यवसायिक इलाका है। यहां एक ओर दुकानदार और प्राइवेट बसें काबिज रहती हैं तो दूसरी ओर बैंक व होटल के अलावा प्रतिष्ठानों में आने जाने वालों के दो व चार पहिया वाहन पटरियों की शोभा बढ़ाते हैं। थोड़ी ही दूरी पर भवन निर्माण सामग्री की दुकानों के बालू, मोरंग व सरिया पटरियों पर रखे गए हैं तो यहां सामान लेकर आने वाले ट्रक आदि भी आधी सड़क पर कब्जा जमाकर सामान आदि उतारते हैं। रंजीत चौक से आगे आटो पार्ट्स की दुकानें हैं, जो वाहनों को पटरी पर ही खड़ाकर उनकी मरम्मत करवाते हैं। कुछ दुकानदारों ने तो नाला को भी कब्जे में कर लिया है। वे नगर पालिका की जमीन में स्थायी निर्माण कराकर अपना धंधा जमाए हुए हैं। रौता चौराहा तक पूरी सड़क अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है, मगर जिम्मेदारों की चुप्पी उनके हौसले बढ़ा रही है। रौता चौराहे से आगे थोड़ी दूरी तक स्थिति ठीक है, मगर उसके बाद फिर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। उस पर पालिका प्रशासन ने डिवाइडर निर्माण भी करवा दिया। इसके चलते सड़क संकरी हो गई है। यहां पटरियों पर लगे विद्युत पोल भी खतरे का संकेत देते हैं।
शहर के निवासी रवींद्र पांडेय कहते हैं पालिका तो सरकारी धन हड़पने का काम कर रही है। जहां सड़क पटरी व नाला की जरूरत है वहां डिवाइडर निर्माण क्यों हो रहा है। यह समझ से परे है।
मालवीय मार्ग निवासी शैलेंद्र त्रिपाठी कहते हैं कि मूलभूत समस्या नाली सड़क व पानी है। पालिका प्रशासन के जिम्मेदार सरकारी धन की बंदरबांट में जुटे हैं। समस्याएं जस की तस हैं।
मालवीय मार्ग निवासी मनोज श्रीवास्तव कहा कि नेहरू तिराहे से लेकर ब्राह्मण महासभा तक के मार्ग पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा रखा है। उसमें तमाम रसूखदार भी शामिल हैं।
बिजली कालोनी के निकट रहने वाली रेनू श्रीवास्तव कहती हैं कि मालवीय मार्ग पर सर्वाधिक आवश्यकता सड़क चौड़ीकरण व नाला निर्माण की है, जिसे पालिका नजरंदाज किए हुए है।
कोट
अतिक्रमण पर पालिका का पूरा ध्यान है। मालवीय मार्ग ही नहीं शहर के सभी प्रमुख स्थानों से अतिक्रमण हटवाया जाएगा। इसकी रूपरेखा तय की गई है। जल्द ही इसे लागू कर नागरिकों के सहयोग से ही अतिक्रमण पर प्रहार होगा।
-रूपम मिश्र, नगर पालिका अध्यक्ष।
बनने के बजाय बिगड़ गई राम जानकी मार्ग की सूरत
बस्ती/कुदरहा। ऐतिहासिक राम जानकी मार्ग पर छह किमी की यात्रा यहां से हर गुजरने वाले राहगीर के लिए यादगार बन जाती है। क्योंकि इतनी दूरी की यात्रा में घंटे भर लगता है। जगह-जगह गिट्टियां बिखरी हैं तो कहीं सड़क ऊंची नीची है। भारी वाहन के चालक की जरा सी लापरवाही दुर्घटना का कारण बन सकती है। यह सब तब है जब लोक निर्माण विभाग के पास इस मार्ग के निर्माण के लिए भरपूर धन उपलब्ध है। यहां तो तब काम शुरू होता है, जब विभाग को किसी मंत्री के आने की भनक लगती है। उनके जाते ही ठेकेदार सब कुछ समेट कर लौट जाता है।
बिहार के सीतामढ़ी से अयोध्या को जोड़ने वाली ऐतिहासिक राम जानकी मार्ग आज भी सूरत बदलने का इंतजार कर रही है। यूं तो सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा प्राप्त है, लेकिन चार साल पहले शुरू कार्य अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। बैसिया कला गांव से लेकर संतकबीरनगर जिले की सीमा तक छह किमी सड़क का निर्माण अधर में है।
ऐसा नहीं है कि यहां काम कराया नहीं जाता, मगर तब जब विभाग को किसी मंत्री अथवा जांच एजेंसी के आने की भनक लगती है। पिछले दिनों भाजपा की चार साल की विकास यात्रा के रथ आने की जानकारी होने के बाद यहां विभाग ने आनन-फानन में काम शुरू करा दिया। सड़क पर गिट्टियां गिरा कर कुछ स्थानों पर तो उसे फैला दिया गया कुछ जगह पर उसे वैसे ही सड़क के बीच छोड़ दिया गया। न तो बालूू डाला गया और न उसे दबाने के लिए रोलर का ही प्रयोग हुआ। कार्यक्रम समाप्त होते ही ठेकेदार अपना सामान समेट गिट्टियों को वैसे ही छोड़ गायब हो गए। अब इस मार्ग पर चलना आसान नहीं रह गया है। गिट्टियां बिखर गईं हैं जिससे इस मार्ग पर यात्रा करने वाले दो पहिया वाहन व पैदल राहगीरों को खतरा हो गया है।
पिपरपाती मुस्तकम निवासी रवि प्रकाश पाल कहते हैं कि चार साल से कौन सड़क बन रही है। इसे पूछने वाला कोई नहीं है। तमाम विकास का दावा करने वाले इस मार्ग पर आएं तो उन्हें विकास का असली चेहरा दिखाई पड़ जाएगा।
टेढ़िया निवासी सुमित्रा कहती हैं इस मार्ग पर जाने में डर लगने लगा है। क्योंकि बिखरीं गिट्टियां कब छिटककर लग जाएं पता नहीं होता। इसका निर्माण कराने वाले निश्चिंत हैं, मगर इस पर यात्रा करने वाले इसका दंश झेल रहे हैं।
परमेश्वरपुर निवासी झिन्ना चौधरी कहते हैं कि लोक निर्माण विभाग ने चार साल में सड़क का निर्माण नहीं पूरा किया। यही विकास है तो जनप्रतिनिधि अपने चेहरे को यहां देख लें। उनका दबाव भी किसी के ऊपर असर नहीं डाल पा रहा है।
कुदरहा कस्बा निवासी अनिल अग्रहरि कहते हैं कि राम जानकी मार्ग ऐतिहासिक सड़क है। इसकी सूरत बदलने के तमाम दावे किए गए थे, मगर वह दावा केवल कागजी है। यहां निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी है। राहगीर परेशान हैं।
कोट
धन विलंब से मिलने के कारण काम पूरा करने में देरी जरूर हुई है, लेकिन अब विभाग को धन मिल गया है। ठेकेदार ने काम भी शुरू कर दिया है। जल्द से जल्द इस मार्ग का निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
-आलोक रमन, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।