बस्ती। बदलते मौसम के कारण गेहूं की फसल में करनालबंट, पत्ती धब्बा रोग व गेरुई रोग के प्रकोप बढ़ने की आशंका हो जाती है। ऐसे में उनके बचाव के लिए समय से उपचार आवश्यक है।
यह जानकारी देते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि पत्ती धब्बा रोग में पीले और भूरे अंडाकार धब्बे नीचे की पत्तियों पर दिखते हैं, जो बाद में कत्थई रंग के होकर हल्के भूरे दिखने लगते हैं। इस रोग के लिए थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत की 700 ग्राम या फिर मैंकोजब 75 प्रतिशत का दो किग्रा 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए।
काली गेरुई रोग में पहले हल्के भूरे रंग के धब्बे पत्तियों पर पड़ते हैं जो बाद में काले हो जाते हैं और तनों तक फैल जाते हैं। इससे फसल सूखने लगती है व दाने पतले हो जाते हैं या फिर बनते ही नहीं। यदि ऐसा लक्षण दिखाई दे तो पांच सौ मिली लीटर प्रापिकाने जोल पांच सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। संवाद