जिले की स्वाट और परशुरामपुर थाने की संयुक्त टीम को एक बड़ी कामयाबी मिली। हत्या करने जा रहा अंतर्जनपदीय बदमाश टीम के हत्थे चढ़ गया। लूट की बाइक और अवैध असलहा लेकर परशुरामपुर थाने के नंदनगर चौरी के पास पकड़े जाने के बाद पुलिस ने पूछताछ की तो दंग रह गई। पुलिस ने बताया कि पकड़ा गया बदमाश 24 अप्रैल 2016 को छावनी के पास एनकाउंटर में मारे गए राम कुमार यादव का सगा भाई शिव कुमार यादव है।
शिवकुमार के खिलाफ जिले के परशुरामपुर थाने के अलावा गोंडा और फैजाबाद जिले में लूट, आपराधिक साजिश, चोरी के अलावा शस्त्र और एनडीपीएस एक्ट के तहत आठ मुकदमे दर्ज हैं। बृहस्पतिवार की दोपहर एएसपी पंकज ने पुलिस कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान इस बात का खुलासा किया। बताया कि शिवकुमार ने जेल में बंद छावनी थाने के एक चर्चित हत्याकांड में सह अभियुक्त धर्मेंद्र गुप्ता से मिलकर परशुरामपुर के मूल निवासी अधिकारी की हत्या की तीन लाख रुपये में सुपारी ली थी। काम को अंजाम देते जाते समय पुलिस ने चेकिंग के दौरान उसे धर दबोचा। आरोपी के पास से तमंचा, कारतूस के अलावा बाइक, नशीली गोलियां और मोबाइल भी बरामद किया गया। एएसपी ने बताया कि 26 अप्रैल 2016 में छावनी थानाक्षेत्र के माझा इलाके में बस्ती पुलिस की स्वाट टीम और सिविल पुलिस के संयुक्त अभियान में रामकुमार मारा गया था। उसके साथी कमलेश मांझी को भी गोलियां लगीं थीं। पुलिस कस्टडी में इलाज के दौरान जिला अस्पताल से मांझी फरार हो गया था। पुलिस के मुताबिक शिवकुमार भाई की पुलिस की गोली से मौत होने के बाद उसके दोस्तों और सहयोगियों से मिलकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने लग गया। सरकारी अधिकारी की हत्या बचाने में कामयाब स्वाट टीम प्रभारी सुधीर सिंह सहित वर्कआउट करने वाली टीम को एसपी की तरफ से 10 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की गई। टीम में अभिमन्यु सिंह, कांस्टेबल मनोज राय, सदानंद यादव के अलावा परशुरामपुर थाने के नव नियुक्त प्रभारी निरीक्षक रमेश, एसआई मोतीलाल, अशोक वर्मा शामिल रहे।
इनामी मांझी के संपर्क में था शिवकुमार
शिवकुमार 26 अप्रैल 2016 को छावनी थाने के गौरियानैन गांव के पास हुए एनकाउंटर में ढेर राम कुमार यादव का दाहिना हाथ कहे जाने वाले कोतवाली अयोध्या के कौशल्याघाट निवासी कमलेश मांझी के लगातार संपर्क में था। पुलिस के अनुसार मांझी तीन मई 2016 को जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड से नाटकीय ढंग से भाग निकला था। इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया लेकिन कामयाब नहीं हुई।
जांघ में फंसी है पुलिस की गोली
पुलिस उस समय कमलेश मांझाी की तलाश पड़ोसी जिलों के दो दर्जन से ज्यादा नर्सिंग होम में कर चुकी थी। उसे अनुमान था कि जांघ में फंसी गोली निकलवाने के लिए किसी न किसी सर्जन के पास वह जरूर जाएगा। लेकिन यह पैंतरा भी खोखला निकला। तब से उसे ढूंढने के लिए गोंडा, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, जौनपुर सहित प्रदेश के अन्य आठ-दस जिले की पुलिस से टीमें संपर्क कर चुकी हैं। थक-हारकर 24 दिसंबर 2016 को उसके फैजाबाद जिले के अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के कौशल्या घाट स्थित मकान की कुर्की भी की गई। लेकिन पुलिस उसकी परछाईं तक नहीं छू सकी।