हर साल रबी सीजन में डीएपी किल्लत का सामना करते हैं किसान
भानपुर के मोहम्मद नगर समिति पर 15 दिनों ने नहीं है डीएपी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। रबी सीजन की बुवाई का समय चल रहा है और समितियों से डीएपी नदारद है। किसान डीएपी के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। वह नैनो डीएपी का उपयोग बुवाई के लिए नहीं करना चाहते हैं। दूसरी ओर विभाग हर सीजन की तरह इस बार भी कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। क्षेत्र की स्थिति जानने के लिए बुधवार को साधन सहकारी समितियों का जायजा लिया गया, ज्यादातर समितियों पर डीएपी उपलब्ध नहीं थी।
बनकटी। साधन सहकारी समितियों पर डीएपी की किल्लत बनी हुई है। सुस्त गति से पहुंच रही डीएपी नाकाफी साबित हो रही है। खाद कब आई और कब खत्म हो गई किसानों को पता ही नहीं चल पाता है। बुधवार को सजनाखोर में डीएपी पहुंचते ही खत्म हो गई। समिति के बाहर किसानों को मेला लगा रहा। 100 से अधिक किसान निराश होकर घर लौट गए। जबकि क्षेत्र के साधन सहकारी समिति खोरिया बसौढ़ी, चित्रखोर, देवमी, महथा सजहरा में डीएपी नहीं है। अमानाबाद टिकरिया व एकमा साधन सहकारी समिति पर चालू सीजन में अब तक डीएपी नहीं पहुंची।
सोनहा। सुबह 11 बजे कोठिला व पड़री समिति बंद मिली। फोन पर सचिव ने बताया कि बृहस्पतिवार तक खाद उपलब्ध हो पाएगी। छावनी केे सहकारी समिति तुर्शी व अमोढ़ा में डीएपी नहीं है। कलवारी समिति के सचिव ने बताया कि देर शाम तक खाद उपलब्ध हो जाएगी। भानपुर के मोहम्मद नगर समिति पर गेहूं बीज और नैनो यूरिया ही मिली। समिति पर 15 दिन से डीएपी नहीं है। दुबौलिया की साधन सहकारी समिति पार व बैरागल से भी डीएपी नदारद है। इसी प्रकार टिनिच, मझौवा बाबू, कठौतियां सांऊडीह आदि समितियों पर भी डीएपी नहीं है।
...
डीएपी का विकल्प नैनो डीएपी व फास्फेटिक उर्वरक
किसान रबी सीजन में फसल की बुवाई के लिए डीएपी का उपयोग अधिक करते हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेम शंकर इसके विकल्प पर चर्चा करते हुए बताया कि सिंगल सुपर फॉस्फेट व नैनो डीएपी बेहतर विकल्प है। इन दोनों का उपयोग किसान फसल बुवाई के समय कर सकते हैं। परिणाम डीएपी से बेहतर मिलेंगे। नैना डीएपी के उपयोग से समय और लागत दाेनों में कमी आई है। यह बाजार में उपलब्ध किसी उर्वरक की तुलना में सबसे सस्ता और अच्छा उत्पाद है।
...
हर सीजन में खाद के लिए मारामारी होती है। यदि अफसर पहले से तैयार कर लें तो स्थितियां खराब नहीं होग।
किसान रामराज पांडेय, भदना
...
गेहूं की बुवाई के लिए दो बोरी डीएपी की जरूरत है। चार दिन से समिति का चक्कर लगा रहा हूं। मगर डीएपी नहीं मिल पा रही।
किसान राम किशन, आमा
...
डीएपी न मिलने से गेहूं की बुवाई पिछड़ रही है। समिति पर जो डीएपी आई थी, वह प्रभावशाली किसानों में बांट दी गई।
किसान रामचरित्र चौधरी, मेघूपुर
...
अधिकारियों को सब पता होता है कि फसल की बुवाई के समय डीएपी की किल्लत होगी, लेकिन वह तैयारी नहीं करते हैं।
किसान ह्रदय राम पाठक, उपाध्यायपुरा
...
कोट
समितियों को लगातार डीएपी भेजी जा रही है। मांग अधिक होने के कारण कुछ ही समय में खाद खत्म हो जा रही है। जिले में पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध है। किल्लत जैसी कोई बात नहीं है।
आशीष श्रीवास्तव, एआर कोआपरेटिव