बस्ती। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले धंधेबाज होली में अब रंग-गुलाल में भी मिलावट कर मुनाफा कमाने की जुगत में हैं। अबीर में मिट्टी, लकड़ी का बुरादा और कई हानिकारक रसायन मिला रहे। इससे यह गुलाल त्वचा पर लगते ही जलन आदि की शिकायत आ सकती है। चिकित्सकों ने कहा कि रंगों और अबीर गुलाल का प्रयोग करते वक्त सावधानी बरतना जरूरी है, इससे स्किन इन्फेक्शन हो सकता है।
जानकारी के अनुसार हर्बल के नाम पर बाजार में कई दुकानों पर केमिकल मिला अबीर और गुलाब बिक रहा है। इसकी चमक देखते ही कोई भी इनकी ओर आकर्षित हो सकता है। मगर, ये मिलावटी रंग-गुलाल चेहरे की रंगत को बिगाड़ देंगे। डॉक्टरों के अनुसार, आंखों और त्वचा के लिए यह मिलावटी रंग नुकसानदेय है। त्योहार की खुशी के बीच सेहत को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। खाद्य पदार्थों को जहरीला बनाने के बाद मिलावटखोरों ने रंग-गुलाल को भी नहीं छोड़ा है। होली को देखते हुए मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। मिलावटी रंग और गुलाल दिल्ली, हाथरस, कानपुर, लखनऊ व गोरखपुर से बस्ती आता है।
पांडेय बाजार के ज्यादातर थाेक दुकानदार यहीं से रंग, अबीर, गुलाल मंगाते हैं और गुलाल ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई करवाते हैं। कम दाम में मिलने वाले गुलाल से यह हर्बल कह कर मोटी कमाई कर रहे हैं। जिले में होली के समय रंग और गुलाल का करीब डेढ़ से दो करोड़ का कारोबार होता है। शहर में बिकने के लिए आया केमिकल युक्त खुशबूदार गुलाल होली के रंग में भंग न डाल दें। होली खेलते समय अगर केमिकल युक्त अबीर गुलाल हमारी आंख व कान में चला जाए तो इससे हमारे शरीर को नुकसान हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि गुलाल हर्बल बताकर बेचा जा रहा है। धूल और चावल के आटे के साथ लकड़ी के बुरादा में केमिकल और रंग डालकर इसे तैयार किया गया है। चिंता की बात यह है कि ये मिलावटी चमकदार गुलाल ज्यादातर दुकानों तक पहुंच भी गए हैं। थोक में इसका रेट 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं, असली गुलाल दो ढाई सौ रुपये किलोग्राम है। दूसरे प्रकार के अबीर में चावल का आटा मिलाया जाता है। इसकी कीमत 50 से 55 रुपये है। चेहरे पर लगाने पर ये थोड़ा मुलायम रहता है। लेकिन इसमें उस चावल का इस्तेमाल किया जाता है जिसे खराब होने पर दुकान से हटा दिया जाता है।
इस चावल को पीसकर आटा बनाया जाता है। इसके बाद मिक्सर में रंग, केमिकल और आटे को खूब मिलाते हैं। तीसरा अरारोट का बना गुलाल है। इसकी कीमत 65 से 70 रुपये है। इसमें भी केमिकल है लेकिन नुकसान कम है। इसके अलावा एक हर्बल गुलाल भी है। लेकिन ज्यादातर दुकानदार अरारोट के गुलाल को ही हर्बल बताकर बेच रहे हैं। ग्राहक पकड़ न पाए इसके लिए गुलाल में खुशबू के लिए फ्रेगरेंस मिलाया जाता है।
50 रुपये का गुलाल फुटकर में बिक जाता है दो सौ रुपये किलो
जानकारों के अनुसार, सामान्य तौर पर अरारोट में रंग मिलाकर गुलाल तैयार किया जाता है। इस समय थोक बाजार में इसकी कीमत 50 रुपये किलो है, लेकिन इसमें भी पत्थर की डस्ट मिलाई जा रही है। ऐसे में इसकी कीमत बहुत कम हो जाती है। पत्थर डस्ट का गुलाल थोक बाजार में 10 रुपये किलो बिक रहा है। इसके इस्तेमाल से त्वचा छिल सकती है। दूसरी ओर थोक बाजार में शुद्ध रंग एक हजार रुपये प्रति किलो से भी महंगा है, लेकिन कई दुकानों पर यह दो सौ रुपये किलो में बिक रहा है। खतरनाक केमिकल मिलाकर उन्हें ज्यादा चटख बनाया जाता है। खासतौर पर नीला, बैंगनी और हरा रंग। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिब सुहेल का कहना है कि रसायनिक रंग आंख में पड़ने से नुकसान हो सकता है। गुलाल और रंग खरीदारी जांच-परख कर करें।
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चेहरे को खराब कर देता है रासायनिक रंग-गुलाल
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुग्रह ने बताया कि मिलावटी गुलाल लगाने से चेहरे को कई नुकसान हो सकते हैं। इसमें मौजूद रसायनिक पदार्थ त्वचा की जलन का कारण बन सकते हैं। कई बार इससे त्वचा पर फोफले पड़ जाते हैं। ज्यादा देर तक चेहरे पर रहने पर इससे खुजली और एलर्जी भी हो सकती है। इससे फेफड़ों की समस्या और त्वचा में संक्रमण भी हो सकता है।
कोट
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम होली के दृष्टिगत मिलावटी खाद्य पदार्थों पर अभियान चला रही है। अब तक खोआ, रंगीन कचरी पकड़े जा चुके हैं। इसके लिए टीम सभी क्षेत्रों में निगरानी करते हुए संदिग्ध दुकानों पर पहुंचकर छापेमारी कर रही है। छापेमारी के दौरान संदिग्ध खाद्य वस्तुओं को जब्त किया जा रहा है। सैंपल भरे जा रहे हैं।
-चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी