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यहां मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में दिल के लिए डॉक्टर नहीं

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जिला अस्पताल में दो दशक से हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं
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बस्ती। जनपद में हृदयरोगियों के इलाज के लिए समुचित प्रबंध नहीं है। पूर्वांचल के मिनी पीजीआई कहे जाने वाले मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक कैली जहां कार्डियोलॉजिस्ट पद के सृजन का अब तक इंतजार कर रहा है वहीं, जिला अस्पताल में पिछले दो दशक से हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है।
जानकारी के मुताबिक असंतुलित खान-पान व वातावरण के कारण हृदयरोग के मामले ज्यादा होते हैं। ऐसे में जिले के लोगों को जरा-सी असावधानी मुश्किल में डाल सकती है। जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्डियोलाजिस्ट नहीं हैं। जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में दो दशक पहले डॉ. बीपी सिंह कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में तैनात थे। बाद में उनका स्थानांतरण बहराइच हो गया। तबसे यह पद रिक्त है। ऐसे में यहां जो भी मरीज आता है, उसे तत्काल गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। ओपेक कैली चिकित्सालय को पूर्वांचल का मिनी पीजीआई कहा जाता है। यहां आधुनिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। लेकिन, हृदयरोग के विशेषज्ञ का पद सृजन न होने के कारण मशीनें ठप हैं। विभाग पर ताला लटक रहा है।
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जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि हृदय रोग विभाग में चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके लिए तमाम पत्राचार शासन से किया जा चुका है। मगर, अब तक यहां कोई तैनाती नहीं हुई। हृदय रोगियों के चिकित्सा की बात फिजीशियन ही प्राथमिक उपचार कर देते हैं। यदि गंभीर रोगी आ जाए तो उसको प्राथमिक उपचार देकर गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि यहां हृदय रोगियों के इलाज के लिए फिजीशियन उपलब्ध हैं, मगर हृदय रोग विभाग के लिए पद ही नहीं सृजित है। संसाधनों को सुरक्षित रखा गया है। जरूरत पड़ने पर फिजीशियन ही हृदय रोगियों का इलाज कर लेते हैं।
हृदयाघात में हर मिनट महत्वपूर्ण
मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मेडिसिन विभाग डॉ. बीएल कन्नौजिया ने कहा कि हृदयाघात में हर मिनट मरीज के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जैसे ही किसी के नाभी के ऊपरी हिस्से में दर्द शुरू हो तत्काल एस्प्रीन और सब्रीट्रेट दे दें। इसके बाद तत्काल चिकित्सक के पास मरीज को ले जाएं।
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ऐसे पहचानें हृदयाघात
डॉ. बीएल कन्नौजिया के मुताबिक हृदयाघात के लक्षण सीने में दर्द अथवा अचानक पसीना आना है। कंधे में दर्द भी हृदय रोग का लक्षण होता है। डॉ. कन्नौजिया ने बताया कि शुगर मरीजों में अधिकांश के हृदयाघात में दर्द नहीं होता। केवल उन्हें अचानक पसीना आने लगता है। घबराहट व बेचैनी के अलावा कभी-कभार उल्टी होने लगती है। यदि यह स्थिति पैदा हो तो तत्काल चिकित्सक के संपर्क में आ जाएं। जितनी जल्दी हो सके मरीज को चिकित्सालय में पहुंचा दें, जहां उनका इलाज शुरू हो सके। हृदयाघात वाले मरीजों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
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