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कलमबंद बयान में उलझा ब्लाक प्रमुख अपहरण कांड

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कलमबंद बयान में उलझा ब्लॉक प्रमुख अपहरण कांड
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बस्ती। हाईप्रोफाइल बन चुके बहादुरपुर ब्लॉक प्रमुख को अपहृत करके बंधक बनाने का मामला ठंडे बस्ते में पड़ता दिख रहा है। इस बहुचर्चित में कलमबंद बयान का पेच अब भी फंसा हुआ है।
पुलिस का कहना है कि वह बिना बयान कराए केस को आगे नहीं बढ़ा सकती। मगर पांच दिन बीत जाने के बावजूद यह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। माना जा रहा है कि अपने ही जाल में उलझ चुके ब्लॉक प्रमुख का पुलिस बयान कराना ही नहीं चाहती है। ताकि यह केस इसी तरह उलझा रहे और समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष व सदर विधायक पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती रहे। इसके पीछे सियासी दांवपेंच भी बताया जा रहा है। हालांकि थानाध्यक्ष कलवारी अरविंद कुमार शाही का कहना है कि वह वादी ओम प्रकाश और ब्लॉक प्रमुख राम कुमार का कलमबंद बयान कराने के प्रयास में है। जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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विधायक महेंद्र नाथ यादव पर ब्लाक प्रमुख राम कुमार के साले ओम प्रकाश ने कलवारी थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके बहनोई, बहन और भांजों को घर से अपहृत करके उन्हें पांच महीने तक बंधक बनाकर रखा। पुलिस ने अपहरण व बंधक बनाने का मुकदमा दर्ज कर जब विधायक के आवास पर पहुंची तो वहां राम कुमार परिवार समेत मिले। उन्हें लेकर जब पुलिस निकलने लगी तो राम कुमार ने सबको यह कहकर चौंका दिया कि वह खुद ही महेंद्र नाथ यादव के यहां आए थे। जिसके बाद पुलिस को लगा कि बाजी पलट सकती है। उसी समय से तमाम सवाल उठाए जाने लगे कि जब राम कुमार खुद ही चलकर महेंद्र नाथ यादव के यहां पहुंचा और रह रहे थे तो अपहरण व बंधक बनाने की बात कहां से आ गई। कानून के जानकार बताते हैं कि इस तरह के केस में आरोपित को फायदा मिलना तय है। मगर सियासी दबाव में पुलिस यह फायदा सपा विधायक उठाने का अवसर देने से बचना चाहती है।
यह है मामला
18 मार्च की शाम थाना कलवारी पर राम कुमार के साले ओमप्रकाश ने तहरीर दी कि उनके जीजा राम कुमार वर्तमान में बहादुरपुर ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुख हैं। उनको 23 अक्तूबर 2021 को सपा जिलाध्यक्ष महेंद्र नाथ यादव अपने साथ ले गए थे। ओम प्रकाश के अनुसार 17 मार्च की रात में रामकुमार ने उनको फोन करके बताया कि उनको जबरदस्ती महेंद्र नाथ यादव को अपने आवास पर बंधक बनाकर रखे हुए हैं और उन्हें निकलने नहीं दिया जा रहा है। एसपी के मुताबिक ओमप्रकाश ने रामकुमार से बातचीत के कुछ ऑडियो क्लिप भी सौंपा है। इसके आधार जब पुलिस विधायक के घर गई तो वहां पर रामकुमार मौजूद मिले। फिलहाल राम कुमार को पत्नी व बच्चों के साथ उनके गांव पहुंचा दिया गया है और उनकी सुरक्षा में पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
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क्या है कलमबंद बयान
सीआरपीसी की धारा-164 के तहत किसी न्यायालय में बयान दर्ज कराया जाता है। यह बयान दर्ज कराते समय संबंधित के अलावा वकील, कर्मचारी या अन्य कोई मौजूद नहीं रहता। मजिस्ट्रेट पीड़ित या उसके गवाह से पूछता है कि उस पर कोई दबाव तो नहीं है। पीड़ित या गवाह जब बताता है कि वह अपनी मर्जी से बयान दे रहा है। तब मजिस्ट्रेट उसे कलमबंद करता है। कई बार ट्रायल के दौरान गवाह आरोप लगाता है कि पुलिस ने जबरन बयान दर्ज किया है और उसने उक्त बयान नहीं दिए थे, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान से उसके लिए मुकरना आसान नहीं होता। बयान देने वाला इसे बदल भी नहीं सकता और न ही उसके दूसरे बयान की कोई मान्यता होती है।
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