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जिम्मेदार नहीं जानते कहां और किस हाल में है पीड़ित बेटी

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जिम्मेदार नहीं जानते कहां और किस हाल में है पीड़ित बेटी
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जिस्मफरोशी प्रकरण : बाल कल्याण समिति ने लखनऊ स्थित बालिका गृह भेजा गया था
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर में मई 2019 में नाबालिग से सौतेली मां द्वारा जिस्मफरोशी कराए जाने का मामले का पर्दाफाश हुआ था। तब पीड़ित किशोरी की तहरीर पर चार लोगों पर केस दर्ज भी हुआ। बाल कल्याण समिति द्वारा बेटी को लखनऊ के मोतीगंज स्थित बालिका गृह भेज दिया गया। अब वह कहां है, किस हाल में है यह बात संबंधित जिम्मेदार स्पष्ट नहीं बता पा रहे।
18 मई 2019 को अमर उजाला ने ‘अपनों ने ही कर दिया बेटी की आबरू का सौदा’ शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी यह मामला छाया रहा। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित टीम ने 29 मई को मामले का पटाक्षेप करते हुए एक महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया। बाद और भी गिरफ्तारियां हुई थीं। उस वक्त के एएसपी ने प्रेसवार्ता में बताया था कि पकड़े गए लोगों का एक संगठित गिरोह है, जो लड़कियों से गलत कार्य कराता है।
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बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष बोलीं, पत्र का लखनऊ से नहीं आया जवाब
नाबालिग किशोरी के विषय में जब बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष उजमा बानो से बात की गई तो, उन्होंने बताया कि बालिका गृह लखनऊ को पत्र भेजकर बालिका के विषय में जानकारी लेने की कोशिश की गई थी। पत्र का कोई जवाब नहीं आया।
मां-बाप को सौंप दिया गया : बाल संरक्षण अधिकारी
बाल संरक्षण अधिकारी बीना सिंह ने बताया कि बालिका को उसके मां बाप को लखनऊ से ही सौंप दिया गया है। जबकि पीड़ित किशोरी ने अपनी सौतेली मां पर ही जिस्मफरोशी कराने का आरोप लगाया था।
पीड़िता का ऑडियो भी हुआ था वायरल
जिश्मफरोसी का मामला उजागर होने के बाद पीड़िता को बाल कल्याण समिति बस्ती द्वारा लखनऊ में मोतीगंज स्थित बालिका गृह में भेज दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, यहां भेजे जाने के बाद कुछ माह बाद सोशल मीडिया पर किशोरी का बचाव के लिए गुहार लगाते एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। हालांकि इसकी जांच नहीं कि यह सही या गलत।
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जल्द ही पड़ताल कराई जाएगी : जिला प्रोबेशन अधिकारी
जिला प्रबोशन अधिकारी राकेश कुमार कहते हैं कि मामला संज्ञान में आ गया है। जल्द ही पड़ताल कराकर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नियमत: बाल संरक्षण अधिकारी को पीड़ित किशोरी से मुलाकात कर उसकी काउंसलिंग करनी चाहिए थी। इसके लिए उनके पास टीम भी है। यह भी पता लगना था कि आखिर वह किस हाल में, फिलहाल पूरे प्रकरण की पड़ताल कराई जाएगी।
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