टिनिच पीएचसी पर आठ माह से चिकित्सक नहीं
- फार्मासिस्ट के हवाले 60 हजार आबादी के सेहत की जिम्मेदारी
- चिकित्सक के अभाव में कम हो गई मरीजों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
टिनिच। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आमा बदहाली का शिकार हो गया है। चिकित्सक व अन्य स्टाफ की कमी से मरीजों का मोह भंग हो रहा है। पिछले आठ माह से चिकित्सक की तैनाती न होने से फार्मासिस्ट अस्पताल संचालित कर रहे हैं। अस्पताल में स्थापित चार बेड वाला प्रसव वार्ड बदहाल हो गया है। सफाई कर्मियों की कमी से परिसर में झाड़ियां उग गई हैं, जिसके चलते प्रसव केंद्र ठप पड़ा है। प्रसव कक्ष में लगे इवर्टर की बैटरी खराब होने के कारण विद्युत कटौती होने पर मोमबत्ती के सहारे काम होता है। यहां तैनात एएनएम सुनीता चौहान ने बताया की लाइट न रहने पर मोमबत्ती के सहारे प्रसव कराया जाता है।
पीएचसी टिनिच वर्ष 1995 में शुरू हुआ। यहां पर एक चिकित्सक एक फार्मासिस्ट व दो एएनएम की तैनाती की गई। 60 हजार से अधिक की आबादी की सेहत की देखभाल की जिम्मेदारी उठाए इस अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. आशुतोष उपाध्याय की अक्तूबर 2021 में मौत हो गई। इसके बाद यहां किसी चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं हुई। यहां तैनात फार्मासिस्ट ने बताया कि डॉ. आशुतोष के समय में हर दिन 80 से 100 मरीज ओपीडी में देखे जाते थे, मगर उनकी मौत के बाद संख्या 10 से 15 हो गई है। यही हाल प्रसव केंद्र का भी है। यहां वर्ष 2014 से स्थापित प्रसव केंद्र में स्टाफ नर्स की तैनाती न होने से एक माह में केवल दो या तीन प्रसव होते हैं। दवा तथा अन्य सुविधाएं न होने से मरीजों को निजी अस्पतालों या फिर झोलछाप का सहारा लेना पड़ता है।
सल्टौआ के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद मिश्र ने बताया कि चिकित्सकों की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों सूचना दी गई है। स्टाफ नर्स की भी डिमांड की गई है। रही परिसर में गंदगी की बात तो यह संज्ञान में नहीं था, जल्द ही सफाई करा दी जाएगी।