बाढ के पानी से सुविका गांव के बाहर स्थित एक छप्पर मे घुसा बाढ का पानी संवाद
बस्ती। तीन दिन तक बढ़ने के बाद सरयू का जलस्तर अब घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। जलस्तर घटने के साथ कई स्थानों पर कटान तेज होने की आशंका ने तटवर्ती परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण नाव और मोटरबोट के सहारे आवागमन कर रहे हैं। कई परिवार तटबंध पर शरण लिए हैं, जबकि कुछ घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
बाढ़ के पानी में धान की फसल डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है। खेतों में पानी जमा होने के कारण फसल सड़ने लगी है। प्रभावित गांवों में पशुओं के चारे और दवाओं की भी दिक्कत बनी हुई है। घरों के आसपास जलभराव और गंदगी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। कई स्कूल परिसरों में भी पानी भरा होने से बच्चों की पढ़ाई और आवागमन प्रभावित है। दुबौलिया संवाद के अनुसार सरयू का जलस्तर घट रहा है, लेकिन मैरुंड गांव सुविका बाबू और आंशिक रूप से प्रभावित टेढ़वा समेत कई गांवों में संकट बरकरार है। ग्रामीण अभी मोटरबोट के सहारे दैनिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं। माझा क्षेत्र में फैला पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। तटबंध विहीन सतहा, बलुईया, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती, श्रीरामपुरवा, बरदिया लोहार और सतहा-भुवरिया के संपर्क मार्गों से भी पानी खिसकने लगा है। सुविका गांव निवासी रामनाथ ने बताया कि इस सीजन में तीसरी बार बाढ़ आई है। बची हुई फसल भी खराब होने के कगार पर है। देवीलाल ने कहा कि जलस्तर खतरे के निशान के आसपास पहुंचते ही गांव बाढ़ से घिर जाता है। इससे राशन, दवा और पशुओं के चारे का संकट पैदा हो जाता है।
कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में नदी का दबाव बना हुआ है। बाढ़ खंड की ओर से संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है और बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं।
केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार बृहस्पतिवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.82 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 92.73 मीटर से नौ सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर में लगातार गिरावट से राहत की उम्मीद है, लेकिन प्रभावित गांवों में जनजीवन अभी सामान्य नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ शरणालय करीब 10 किलोमीटर दूर है, इसलिए वे घर छोड़कर वहां जाने के बजाय अपने मकानों में ही रहना चाहते हैं।