अधिवक्ताओं ने किया कार्य बहिष्कार, मुकदमे प्रभावित
हर्रैया। करीब दो माह पहले बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व तहसीलदार के बीच हुए विवाद का अभी तक हल निकलता नहीं दिख रहा है। अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार व धरने के कारण वादकारियों का हित प्रभावित हो रहा है। अधिवक्ता करीब दो माह से तहसीलदार की गिरफ्तारी व स्थानांतरण की मांग करते हुए तहसील परिसर में धरना दे रहे हैं जिससे धारा 24 सहित तमाम मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
गौरतलब है कि सात मार्च को बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता महिनाथ त्रिपाठी किसी कार्य को लेकर तहसीलदार सतेंद्र सिंह से मिलने उनके कार्यालय में पहुंचे थे। दोनों में किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया था। अधिवक्ता महिनाथ का आरोप है कि तहसीलदार व दो संग्रह अमीनों ने उनके साथ मारपीट किया था। सारे फसाद की जड़ तहसील में कार्य कर रहे बाबूओं से जुड़ी है। अधिवक्ताओं ने बताया कि धन उगाही के लिए पटलों पर कार्यरत बाबू फाइलों को दबाकर रख लेते हैं। अधिकारियों से शिकायत करने पर वे अभद्रता करते हैं। अधिवक्ताओं ने तहसीलदार सहित अन्य दो पर लूट, मारपीट और अभद्रता का मुकदमा दर्ज कराया है। जबकि तहसीलदार की ओर से अमीन सुरेंद्र की तहरीर पर अधिवक्ताओं पर पर रुपये छीनने व एससीएसटी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। अधिवक्ताओं के धरने के कारण न्यायालयों में धारा 24, धारा 34, व 38 के सैकड़ों मामले लंबित हैं। बार एसोसिएशन अध्यक्ष माधव शरण त्रिपाठी ने बताया कि प्रशासन तहसीलदार को बचाने में लगा हुआ है। केस दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। गुण दोष के आधार पर सुनवाई किए बगैर अधिकतर वाद निरस्त किये जा रहे हैं।
वादों पर चल रही है सुनवाई
- बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से दो बार बातचीत करने का प्रयास किया गया। लेकिन, बात नहीं बनी। वादकारियों का कोई अहित नहीं हो रहा है। उच्च न्यायालय से जारी दिशा निर्देश के अनुसार लंबित वादों पर सुनवाई व निस्तारण चल रहा है।
अमृतपाल कौर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, हर्रैया