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शत्रु संपत्ति तलाशने में जुटा प्रशासन

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शत्रु संपत्ति तलाशने में जुटा प्रशासन
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बस्ती। जिले के ऐसे लोग जो देश विभाजन के बाद पाकिस्तान में जाकर बस गए, लेकिन उनकी जमीनें अब भी यहां बेनाम पड़ी हैं। उन पर लोग काबिज हैं। इस पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। अभिलेख को खंगाला जा रहा है। पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन इन संपत्तियों को कब्जे में ले लेगा।
सूत्रों का कहना है कि शहर के गांधीनगर इलाके में कुछ शत्रु संपत्ति है। इन पर कुछ लोगों का कब्जा है। इसके अलावा स्टेशन रोड, शहर के पुरानी बस्ती सहित अन्य इलाके में भी शत्रु संपत्ति बताई जा रही है। ग्रामीण अंचलों की यदि बात करें तो भानपुर नरखोरिया, रुधौली, कलवारी सहित अन्य स्थान पर भी शत्रु संपत्तियां हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता आरके उपाध्याय बताते हैं कि बंटवारे के दौरान देश छोड़ कर गए लोगों की संपत्ति सहित, 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत सरकार ने इन देशों के नागरिकों की संपत्तियों को सीज कर दिया था। इन्हीं संपत्तियों को शत्रु संपत्ति करार दिया गया है। इन संपत्तियों में भूमि, मकान, फार्म, शेयर, बैंक बैलेंस, प्रोविडेंट फंड समेत अचल-चल चीजें शामिल हैं। फिलहाल इन संपत्तियों की देखरेख की जिम्मेदारी कस्टोडियन ऑफ एनमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया के पास है। युद्ध के दौर में चीन और पाक छोड़ने वाले भारतीयों की संपत्ति की सुरक्षा करने में असफल रहने के बाद भारत सरकार ने यह कदम उठाया था। डीएम आशुतोष निरंजन का कहना है कि जिले में शत्रु संपत्ति तलाशने के लिए राजस्व विभाग की टीमों को लगाया गया है। जल्द ही स्थिति साफ हो जाएगी कि कहां-कहां शत्रु संपत्ति है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा संपत्तियां
विभाजन के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक लोगों ने पलायन किया है। पाकिस्तान गए लोगों से संबंधित 9,281 शत्रु संपत्तियों में से उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 4,991 संपत्तियां हैं।
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