छप्पर रखते समय गिरी दीवार, दबकर युवक की मौत
कप्तानगंज थाने के पगार गांव की घटना
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज (बस्ती)। छप्पर रखते समय ईंट की दीवार गिर जाने से कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पगार गांव निवासी 42 वर्षीय युवक उसके नीचे दब गया। जिला अस्पताल से मेडिकल कालेज ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के पगार गांव में रविवार शाम 42 वर्षीय रामतेज पुत्र सूर्यभान अपने 13 वर्षीय पुत्र धनंजय उर्फ बबुन्ने के साथ जोड़ी गई ईंट की दीवाल पर छप्पर रखने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान दीवाल के सरक जाने से ईंट सहित पिता पुत्र जमीन पर गिर गए। जिससे रामतेज के सिर व शरीर में कई जगह चोट लगी। जबकि धनंजय को हल्की चोट आई। लोग राम तेज को लेकर कप्तानगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। गंभीर स्थिति देख चिकित्सक ने मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया। गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में मातम छा गया। परिवार के लोगों ने पूरे घटनाक्रम से थानाध्यक्ष को अवगत कराया। एसआई जावेद खान के साथ अन्य पुलिस कर्मी ने शव को कब्जे में लेकर वैधानिक कार्रवाई में जुट गए।
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बच्चों पर टूटा विपत्ति का पहाड़
कप्तानगंज। रामतेज की असामयिक मौत के साथ ही उनकी 14 वर्षीय बेटी मोनिका तथा 13 वर्षीय पुत्र धनंजय अनाथ हो गए। दोनों पर विपत्ति का पहाड़ टूट गया है। जब दोनों की उम्र पांच साल से कम थी, तभी इनकी मां राधिका देवी की असामयिक मौत हो गई थी। तब से मुफलिसी में जिंदगी बिता रहे पिता रामतेज ने अपने बच्चों को किसी तरह से पाला। एक दौर तो ऐसा आया जब जिंदगी के संघर्षों से हार कर राम तेज घर छोड़कर कहीं चले गए थे। रिश्तेदारों ने इन दोनों बच्चों की परवरिश की। इधर कुछ वर्षों से जिंदगी की गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर आ रही थी। किसी तरह इंतजाम करके रामतेज ने घर की दीवाल तो खड़ी कर ली थी, लेकिन छत नहीं लगा पाए थे। प्लास्टिक की पन्नी के छाजन के नीचे अपना जीवन बसर करते थे। बरसात के मौसम में दीवाल ना गिर जाए, इस कारण छप्पर रखने का प्रयास कर रहे थे। तभी यह हादसा हो गया। अब इन दोनों बच्चों का क्या होगा, यह लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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खुल रही सरकारी दावे की पोल
गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे भूमिहीन किसान रामतेज कई वर्षों से एक आवास के लिए प्रयासरत थे, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। एक तरफ सरकारी तंत्र यह कहते नहीं थकता की सभी के लिए पक्के घर की व्यवस्था होगी। लेकिन एक ऐसा परिवार जो इतनी गरीबी में जीवन बसर कर रहा था। उसे इतने दिनों तक एक आवास ना मिल पाना सरकारी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है।