किसानों को साहूकारों से बचाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का शुभारंभ किया गया था, लेकिन जिले में मात्र 5.4 फीसदी किसान ही इस योजना का लाभ ले पा रहे हैं। इसमें से 70 फीसदी किसान समय से ऋण चुकता नहीं कर रहे हैं। जिससे बैंकों ने खातों को अनियमित कर दिया। इस कारण किसान फसल बीमा समेत कई योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल तीन लाख 32 हजार 32 किसान हैं। इनमें अधिकतर किसानों के पास खेतीबाड़ी के लिए न तो संसाधन उपलब्ध हैं और न ही धन है। ऐसे में किसान खेती के लिए साहूकार से कर्ज लेता है। इसे देखते हुए केसीसी के साथ ही एटीएम कार्ड देने की योजना बनाई गई थी।
विभागीय अफसरों के मुताबिक शुरूआत में तो इस योजना का लाभ अधिकतर किसानों ने उठाया, मगर जब किसानों को कर्ज चुकता करने की बारी आई तो स्थित पहले जैसी हो गई। वर्तमान में मात्र 18038 किसानों के पास केसीसी रह गया है।
इस संबंध में लीड बैंक के मैनेजर जगदीश त्रिपाठी ने बताया कि नियमानुसार किसानों को पहली फसल बेचने के बाद लोन की अदायगी कर देनी चाहिए, मगर दूसरी फसल बेचने केे बाद भी बैंक का कर्ज नहीं चुकाया। मजबूर होकर बैंकों द्वारा ऐसे खातों को अनियमित करना पड़ा। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष केसीसी धारकों की संख्या दोगुनी हुई है।