बस्ती। जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी गांवों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद में तेजी आई है। चालू सत्र में ढाई हजार नए समूह का गठन हुआ है, जिसमें 40 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। अब इन्हें प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाएगा और फिर लखपति दीदी बनाएंगे।
स्वरोजगार के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जिले की 40 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जाएगा। इसके लिए इन महिलाओं को कृषि व गैर कृषि आधारित रोजगार से सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। स्वरोजगार करने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़ी इन महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से आर्थिक मदद मिलेगी।
गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन वरदान बन रही है। जिले में 18 हजार से अधिक महिला समूहों का गठन किया जा चुका है। इसके माध्यम से करीब ढाई लाख महिलाओं को अब तक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 12 हजार समूहों को बढ़ाने की तैयारी है। इसमें से ढाई हजार समूह के गठन के साथ करीब 40 हजार महिलाओं को जोड़ा जा चुका है।
इन्हें लखपति दीदी बनाने के लिए कृषि आधारित स्वरोजगार जैसे गेंदा व गुलाब के फूलों की खेती, स्ट्रॉबेरी फल की खेती, मशरूम उत्पादन, थाई अमरूद की खेती, गन्ना उत्पादन व जैविक सब्जियों का उत्पादन से सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही गाय, भैंस, भेड़ व बकरी पालन से होने वाली आय के साथ ही गैर कृषि आधारित कारोबार जैसे गुड़ तैयार करना, शहद उत्पादन, कुल्हड़ निर्माण, अगरबत्ती, मोमबत्ती व सैनिटरी पैड निर्माण से भी महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जाएगा।
कोट
समूह का गठन ब्लॉकवार कराया जा रहा है। जो महिलाएं जुड़ चुकी हैं उन्हें शेड्यूल के अनुसार ट्रेनिंग दिलाई जाएगी।
-आशादेवी, डीसी एनआरएलएम, बस्ती।