बस्ती। धान खरीद का समय अब बिल्कुल करीब है। शासन के निर्देशों के अनुसार पहली नवंबर से खरीद शुरू हो जाएगी। इस बार धान खरीद का लक्ष्य 74100 एमटी तय किया गया है। इसके लिए कुल 60 केंद्र स्थापित हैं। यही नहीं कुटाई के लिए कुल 17 मिलों का संबद्धीकरण भी खाद्य विभाग ने किया है। हालांकि यह सब कुछ अभी कागजों में ही है। क्योंकि कुटाई के लिए संबद्ध राइस मिलों ने इस बार धान खरीद से हाथ खींच लिए हैं, साथ ही बृहस्पतिवार को सचिवों ने भी पहली नवंबर से आंदोलन की चेतावनी दी है।
पश्चिम में लक्ष्य के सापेक्ष झटका खा रही खरीद को पूर्वी क्षेत्र में भी झटका लगने के आसार बढ़ गए हैं। इसका कारण यह है कि व्यवस्था में सहयोग देने वाली राइस मिलें व सहकारी समितियों के सचिव अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। मिलर धान की रिकबरी 54 से 56 प्रतिशत तथा 13 प्रतिशत आर्द्रता की धान की मांग कर रहे हैं तो सहकारी समितियों का प्रदेशीय संगठन सचिवों को राज्यकर्मी घोषित करने सहित तीन सूत्री मांग पर अड़ा है। जिन 60 केंद्रों से खरीद का दावा किया जा रहा है, उसमें से 39 केंद्र पीसीएफ के हैं। जिसे सहकारी समितियों के सचिव संचालित करते हैं। यानी खरीद के लिए महज 21 केंद्र ही शेष हैं। ऐसे में खरीद पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सहकारी समिति संघ के अध्यक्ष अयोध्या पांडेय ने कहा कि प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर पहली नवंबर से कामकाज ठप कर दिया जाएगा।
इसमें जहां धान खरीद शामिल है, वहीं खाद व बीज वितरण पर भी रोक लगा दिया जाएगा। राइस मिलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन जयेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राइस मिलर तो कुटाई के लिए अनुबंध करने को तैयार हैं, मगर अब एकतरफा अनुबंध नहीं होगा। संगठन राइस मिलों की मांग को भी अनुबंध में शामिल करेगा। इसमें धान की रिकवरी व आर्द्रता 13 फीसदी के अलावा गोदामों पर तत्काल चावल उतारने की मांग शामिल है। यदि मांगे पूरी नहीं हुईं तो इस बार राइस मिलर अपनी चाबी प्रशासन को सौंप देंगे।