सफलता के लिए हुनर, लगन, विषम परिस्थितियों के साथ सामंजस्य और धैर्य का होना बहुत जरूरी है। कामयाबी की कुछ ऐसी ही मिसाल डेयरी संचालक के बेटे ने पेश की है। डेयरी में जमा होने वाले गोबर के निस्तारण का विकल्प नालियां नहीं बल्कि खेत हों, यह संकल्प लेकर परधौली के प्रतीक बजाज ने सीए की तैयारी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट का कारोबार शुरू किया। 50 हजार की लागत से शुरू किया कारोबार अब 30 लाख टर्नओवर तक पहुंच चुका है।
प्रतीक ने बताया कि एमकॉम पूरा होने के दौरान उन्होंने एक फार्मूला खोजा। इससे केमिकल का प्रयोग 50 फीसदी कम होने लगा, जबकि पैदावार 20 फीसदी तक बढ़ गई। कोरोना के दौरान जब हर ओर लोग परेशान थे, तब वर्मी कंपोस्ट में कोई दिक्कत नहीं आई बल्कि मांग बढ़ी। शुरुआत कुछ किसानों से हुई और अब प्रतीक के साथ 1,534 किसान जुड़े गए हैं। मांग बढ़ने से उत्पादन भी बढ़ाना पड़ा। गांव में ही बड़ा प्लांट लगा लिया। आसपास के पढ़े-लिखे युवाओें को प्रशिक्षित करने लगे। प्लांट पर 17 लोगों को जॉब भी दी है।
प्रतीक का मानना है कि उनका लक्ष्य प्लांट से मुनाफा लेना नहीं बल्कि असीमित संभावनाओं से युवाओं को जागरूक करना है, ताकि सभी आत्मनिर्भर बन सकें। उनके मुताबिक अब सालाना उत्पादन 1,500 टन तक जा पहुंचा है। टर्नओवर 30 लाख रुपये है। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल, महाराष्ट्र, बिहार तक उत्पाद की आपूर्ति हो रही है। पत्नी वर्तिका बजाज महिलाओं को रोजगार के गुर सिखा रही हैं। अब नगर निगम गोशाला से गोबर लाकर प्रोसेस कर रहे हैं। बायो कंपोस्ट के लिए सेमीखेड़ा फैक्टरी से भी सहयोग ले रहे हैं।