बताते हैं कि तीन-चार साल पहले मेंथा व्यापार में उन्हें काफी घाटा हो गया था। बकाया को लेकर उन पर व्यापारियों का दबाव बढ़ा तो पिता महेंद्र गुप्ता ने सभी व्यापारियों का बकाया चुकता कर दिया था। यहां तक कि महेंद्र को कृषि योग्य जमीन भी बेचनी पड़ गई थी। इसके बाद अप्पू ने फिर से खुद का व्यापार जमा लिया था।
हमेशा साथ रखते थे लाइसेंसी पिस्टल
बताया तो यहां तक जा रहा है कि कुछ लोगों पर अब अप्पू का ही बकाया था। परिजन फिलहाल सुसाइड नोट को लेकर ज्यादा नहीं बता पा रहे हैं। मृतक अप्पू के चाचा सर्वेश ने बताया कि उसके पिता ने दो-तीन बार फोन पर कॉल की थी, लेकिन अप्पू का फोन नहीं उठा तो वह खुद ही बदायूं चले गए थे। उन्होंने अप्पू का शव कमरे में पड़ा देखा, तभी पुलिस को बुलाया गया। वह अपनी लाइसेंसी पिस्टल हमेशा साथ रखते थे।
मेंथा व्यापारी संजय गुप्ता ने अपने सुसाइड नोट में कई व्यापारियों पर पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की उधारी होने की बात लिखी है। सिविल लाइंस पुलिस ने बताया कि बरेली के रहने वाले व्यापारी, जिसका मकान इंदिरा चौक पर है उस पर साढ़े चार करोड़, उझानी और बरेली के अन्य व्यापारियों पर भी 20 से 30 लाख रुपये बकाया होने की बात लिखी है। पैसा वापस न मिलने की वजह से वह परेशान थे, इस बात का जिक्र भी सुसाइड नोट में है।