फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सैंपल की जांच नहीं कराएंगे... ऐसे कोराना मुक्त बनाएंगे

विज्ञापन
जांच के जाने को रखे कोराना के सैंपल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही : 15 दिन से जांच को नहीं भेजे जा रहे 15 हजार सैंपल
विज्ञापन

शहर समेत शेरगढ़, क्यारा, फतेहगंज पश्चिमी, परदौली आदि इलाकों में हुई थी कोरोना संदिग्धों की सैंपलिंग
बरेली। कोरोना की संभावित तीसरी लहर की रोकथाम में स्वास्थ्य विभाग खेल करने लगा है। जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों समेत स्टेटिक और मेडिकल मोबाइल यूनिट की ओर से लिए जा रहे आरटीपीसीआर सैंपल की करीब 15 दिन से जांच ही नहीं हो रही है। लगभग 15 हजार से ज्यादा सैंपल फ्लू कॉर्नर में पड़े हैं। इनमें से कई के खराब होने की भी आशंका है।
कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर की आहट हो चुकी है। यहां भी कई राज्यों में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को बड़े पैमाने पर कोरोना संदिग्धों के सैंपल लेकर उनकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। ताकि समय से संक्रमण का पता चलने पर उसके फैलाव को रोका जा सके। मगर, बरेली में शासन के इस आदेश को स्वास्थ्य विभाग ने मखौल बनाकर रख दिया है। कोरोना सैंपलिंग तो प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र के साथ टीमें कर रही हैं, मगर सैंपल की जांच कराने के बजाय उन्हें फ्लू कॉर्नर के एक रूम में स्टोर किया जा रहा है।
विज्ञापन

जानकारी के मुताबिक एक नवंबर से अब तक जिले के तमाम केंद्रों और टीमों द्वारा लिए गए आरटीपीसीआर सैंपल की जांच ही नहीं हो सकी है। करीब 15 हजार से ज्यादा सैंपल फ्लू कॉर्नर में पैक कर रखे हुए हैं। इनमें शहर के राजेंद्रनगर, इज्जतनगर, रामपुर गार्डन, सेटेलाइट, शील चौराहा, निजी अस्पतालों समेत शेरगढ़, क्यारा, फतेहगंज पश्चिमी, परदौली आदि इलाकों के संदिग्धों के सैंपल शामिल हैं।
खराब हो चुके हैं तमाम सैंपल
आरटीपीसीआर सैंपल को कंसाइनमेंट कंटेनर या थर्माकोल बॉक्स में रखा जाता है। बताया जाता है कि सैंपल लेने के करीब 24 घंटे तक बगैर आइस पैक के भी सुरक्षित रहता है। इसे जिस सॉल्युशन में मिलाया जाता है वही इसे सुरक्षित रखता है। इसके बाद प्रमाणिकता का प्रतिशत कम होता जाता है। 32 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान होने पर सैंपल खराब होने की आशंका रहती है। लिहाजा, तापमान नियंत्रित रखने के लिए बॉक्स में आइस पैक लगाए जाते हैं। मगर, फ्लू कॉर्नर में रखे गए किसी भी बॉक्स में आइस पैक नहीं लगा है। लिहाजा, सैकड़ों सैंपल खराब होने की आशंका है।
निगेटिव रिपोर्ट बताकर कर रहे भ्रमित
बताया जाता है कि सैंपलिंग कराने के बाद रिपोर्ट की जानकारी के लिए लोग स्वास्थ्य केंद्रों या संबंधित टीम से पूछताछ कर रहे हैं तो वह रिपोर्ट को निगेटिव बताकर हंगामा से बच रहे हैं। वहीं, रिपोर्ट ऑनलाइन मांगने पर सीएमओ कार्यालय पर संपर्क करने का सुझाव दे रहे हैं। इसकी वजह से जो संदिग्ध हैं वे रिपोर्ट को निगेटिव मानकर दूसरे लोगों के संपर्क में भी आ रहे हैं। इनमें से अगर कोई संक्रमित मिला तो वह सैकड़ों लोगों के संपर्क में आया होगा। लिहाजा, जिले में तीसरी लहर हावी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। उधर, अफसर प्रकरण पर साफ तरीके से कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
बगैर बताए अवकाश पर गए कर्मचारी
कोरोना सैंपलिंग के नोडल अफसर डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह के मुताबिक पिछले दिनों विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों समेत टीमों से प्राप्त होने वाले सैंपल की कंसाइनमेंट रिपोर्ट बनाने वाले दोनों कर्मचारी बगैर बताए अवकाश पर चले गए थे। इसकी वजह से रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी और सैंपल जांच को लैब नहीं भेजे जा सके। प्रकरण की जानकारी पर उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने करीब पांच माह से वेतन न मिलने की वजह से कार्य करने से इनकार कर दिया। किसी तरह उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराके एक माह का वेतन दिलाया गया है। अब कार्य करने पर सहमति जताते हुए वापस आने की बात कही है।
विज्ञापन

महामारी के बीच कोरोना मुक्त होगा जिला
पिछले माह महज 15 घंटे के लिए बरेली कोरोना मुक्त हुआ था। मगर अगले ही दिन एक महिला संक्रमित मिल गई थी। उसका होम आइसोलेशन पूरा होने के 24 घंटे बाद ही एक युवक संक्रमित मिल गया। अगले ही दिन उसके दो परिजन और एक अन्य महिला संक्रमित मिली थी। फिलहाल, जिले में चार सक्रिय कोरोना संक्रमित हैं। यह स्थिति तब है जब इनके सैंपल की एंटीजन जांच कराई गई थी। एक नवंबर से अब तक 15 हजार से ज्यादा संदिग्ध संक्रमितों की आरटीपीसीआर जांच ही नहीं हुई है। उधर, दो दिन बाद सक्रिय केसों का होम आइसोलेशन ओवर होने पर स्वास्थ्य विभाग जिले के कोरोना मुक्त होने का दावा कर रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें