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मंत्री जी! हमारे बच्चे मारे गए तो आप वहां क्यों गए

Sun, 24 Sep 2017 01:52 AM IST
बरेली
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एमबीबीएस की छात्रा अनन्या के पिता अनादि दीक्षित और यश के पिता मनोज खटवानी ने शनिवार को सर्किट हाउस में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से मुलाकात की। उनसे सवाल दागा, ‘जिस मेडिकल कॉलेज में हमारे बच्चों की हत्या कर शव लटका दिए गए, आपके उसी मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने जाने से हमें पीड़ा हुई है।’पीड़ित परिवारों के तीखे सवालों के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें शांत किया। दोनों छात्रों के परिवारों की पूरी बात समझने के बाद उन्हें पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। कहा, जांच के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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एक मेडिकल कालेज में हो चुकी दो विद्यार्थियों की संदिग्ध मौतों के बाद पीड़ित परिवार एक साथ आ गए हैं। दोनों के अभिभावकों ने आईजी एसके भगत और एसएसपी जोगेंद्र कुमार से भी मुलाकात की। एमबीबीएस स्टूडेंट यश की मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में 2015 में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। उनके पिता मनोज ने भी पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। अनन्या के पिता अनादि ने कहा कि कई ऐसे कारण हैं जो अनन्या की हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस ने जो तस्वीरें ली थीं, उन्हें जांच के लिए मुरादाबाद फोरेंसिक लैब भेज रहे हैं। एसपी क्राइम, एसपी देहात की अगुवाई वाली टीम को जल्द इनपुट सामने लाने के लिए भी कहा है।
चश्मा कहां गया
अनादि ने कहा कि अनन्या मोटे लेंस का चश्मा लगाती थी। घटना के बाद जब पुलिस हॉस्टल के कमरे में पहुंची तो वहां बाकी सामान के साथ उसे अनन्या का चश्मा नहीं मिला। इससे लगता है कि अनन्या के साथ घटना कहीं और हुई। बाद में उसके शरीर को कमरे में लाकर फंदे पर लटका दिया गया। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी संदेह जताया। कहा, क्राइम सीन में मेडिकल कॉलेज प्रशासन के आने का मकसद ही साक्ष्य मिटाना होता है।
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सुसाइड नोट क्यों नहीं मिला
अनादि ने सवाल उठाया कि आखिर क्या वजह रही कि अनन्या और उससे पहले हुई पांच स्टूडेंट की संदिग्ध हालात में मौत के बाद एक भी सुसाइड नोट नहीं मिला। बोले, दरअसल सुसाइड नोट में बच्चा असली परेशानी लिखता होगा। रैगिंग, जेल जैसा वातावरण और खुद कॉलेज प्रशासन कहता है कि पांच बजे के बाद छात्र अकेले बाहर नहीं निकल सकते। उन्होंने आशंका जताई कि इन मौतों के पीछे रैगिंग हो सकती है या कोई डॉक्टर भी हो सकता है, जो अकेले में बच्चों पर अटैक करता होगा।
ये अभिभावक आए साथ
अनन्या दीक्षित की मौत के बाद उनके पिता अनादि दीक्षित के साथ इस लड़ाई में मनोज खटवानी, अजित सिंह और आरपी सिंह भी आ गए हैं। मनोज के बेटे यश खटवानी की 2015, अजित की बेटी प्रियंका की भी 2015 और आरपी सिंह की बेटी अंकिता की 2011 में मेडिकल कॉलेज में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।
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घटनाएं दुखद हैं। हम हर तरह की जांच मेें सहयोग कर रहे हैं। जांच एजेेंसी कोई भी हो, सभी जानकारी उपलब्ध करवाई जाएंगी। अनन्या के पिता कभी हमसे नहीं मिले, लेकिन उनके मांगने पर ऑनलाइन जानकारियां उपलब्ध करवाई गईं हैं। मंत्री जी से मिलना, पीड़ित परिवार का अधिकार है। 
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- मेडिकल कॉलेज प्रबंधन 
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