कोई साधु कैसे गलत हो सकता है, गलत तो वो लोग होते हैं जो अपने स्वार्थ के लिए साधु का भेष अपना लेते हैं। अखाड़ा परिषद ने हाल ही में जिनका निष्कासन किया है, वे भी साधु के भेष में गलत लोग थे। छद्म भेष में रहने वाले लोगों के कारण साधुओं को न बदनाम किया जाए। महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानंद सरस्वती जी ने शुक्रवार को पत्रकारों की ओर से पूछे गए सवालों पर ये बातें कहीं।
श्री बांके बिहारी मंदिर में रविवार से शुरू हो रही संगीतमय राम कथा और प्रवचन करने आए स्वामी जी ने कहा संन्यासी एक विस्तृत परंपरा है। कोई भी यकायक संन्यासी नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि देश में 13 अखाड़े हैं। इनमें सात अखाड़े संन्यासियों के हैं जबकि छह वैष्णव संतों के हैं। उन्होंने कहा कि अगर संन्यासी समुदाय में अगर कुछ गलत हो रहा है तो अखाड़ा परिषद आवाज तो उठाएगा ही। इसमें अस्वाभाविक क्या है।
महामंडलेश्वर ने बाबा राम रहीम के सवाल पर कहा कि वह कहां से साधु है। वह भी तो छद्म भेषधारी है। देश के राजनेताओं पर उन्होंने टिप्पणी की कि नेताओं को समाज की परख होनी चाहिए। देश विश्व समुदाय में इस समय कहां खड़ा है और कहां जा रहा है, यह समझने की योग्यता तो फिलहाल किसी में नहीं है। उन्होंने नेताओं को नैतिकता का पाठ भी जरूर पढ़ाया जाना चाहिए। महामंडलेश्वर ने कहा कि चरित्र चिंतन से ही बनता है और आज चिंतन हर ओर अभाव है। राम मंदिर के सवाल पर बोले, मंदिर तो अवश्य बनना चाहिए।
संगीतमय रामकथा कल से
बरेली। शाश्वत परिवार बरेली और सहयोगी संस्था पूजा सेवा संस्थान की ओर से बांके बिहारी मंदिर में संगीतमय रामकथा 24 सितंबर से शुरू होगी। कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानंद सरस्वती जी महाराज रामकथा का गुणगान करेंगे। राम कथा शाम साढ़े पांच से रात साढ़े आठ बजे तक होगी। रामकथा का समापन 29 सितंबर को होगा। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानंद सरस्वती देश-विदेश में कथा वाचन कर चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने मारीशस में राम कथा का वाचन किया था।