कोरोना ने तोड़ा दुर्गा प्रतिमाएं बनाने वाले कलाकारों का हौसला
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ज्यादातर पंडालों में चित्र के साथ ही कलश स्थापना की तैयारी
बरेली। कोरोना ने सबकुछ बदल दिया। लोगों की रोजी-रोटी छिनने के साथ तमाम परंपराएं भी बदल गईं। नवरात्र पर दुर्गा प्रतिमाएं बनाने वाले कलाकार भी इस बार माटी में हाथ लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। प्रतिमाएं न बनने की वजह से इस बार ज्यादातर जगह मां दुर्गा का चित्र रखकर कलश की स्थापना करने की तैयारी की जा रही है। भक्तों में भी इससे मायूसी है, हालांकि दुर्गा पूजा आयोजकों का कहना है कि प्रतिमाओं का पूजन न किए जाने के बाद भी मां दुर्गा की कृपा में कोई कमी नहीं आएगी।
दुर्गा पूजा में हर साल धूमधाम के साथ अच्छी-खासी भीड़भाड़ भी रहती है लेकिन इस बार ये कार्यक्रम सरकार की गाइड लाइन के तहत मनाए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में सामाजिक दूरी, मास्क लगाने, सैनिटाइजर का प्रयोग करने और श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग जैसी एडवाइजरी का सभी को पालन करना होगा। दुर्गा पूजा का स्वरूप भी बदला नजर आएगा। दरअसल मार्च से कोरोना संक्रमण के लगातार भयावह होते जाने के कारण इस बार कलाकार बड़ी दुर्गा प्रतिमाएं बनाने का हौसला नहीं जुटा पाए। कुछ दिनों पहले गणेश चतुर्थी पर भी इसका असर दिखा था। बड़ी प्रतिमाएं न बनने के कारण लोगों को छोटी मूर्ति का पूजन और विसर्जन करना पड़ा था। अब दुर्गा पूजा पर भी बड़ी प्रतिमाएं उपलब्ध नहीं हैं।
दुर्गा पूजा आयोजकों का कहना है कि पंडाल लगाकर हर साल की तरह कलश की स्थापना की जाएगी, हालांकि मां दुर्गा की प्रतिमा के स्थान पर इस बार उनके चित्र रखे जाएंगे। चार दिन पूजन के बाद दशहरे पर कलश और चित्र का ही विसर्जन किया जाएगा। बंगाली कल्चरल वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष ध्रुव चटर्जी ने बताया कि दुर्गा मां हर साल की तरह मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी के साथ अपने मायके आएंगी। चार दिन बाद जब विसर्जन होगा तो शिव जी के पास चली जाएंगी। दुर्गा पूजा कमेटी रोड नंबर चार के नंदन चक्रवर्ती ने बताया कि इस बार भीड़ इकट्ठी नहीं होने देनी है। हालांकि पंडाल लगेगा और लोग भी आएंगे लेकिन आपसी दूरी का पूरा ख्याल रखा जाएगा। रोड नंबर सात इज्जतनगर के कालीबाड़ी मंदिर के देवाशीष पंडित ने कहा कि इस बार भव्य आयोजन के बजाय सिर्फ कलश पूजा होगी। वैसे हर साल इस आयोजन में तीन हजार से ज्यादा लोग जुटते थे।