वन विभाग ने और मिले पगचिह्नों के आधार पर बाघ आने की पुष्टि की
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लौटने के निशान नहीं मिले, तलाश में भी नहीं चला बाघ का कुछ पता
आंवला। रामगंगा के खादर वाले गुजरहाई गांव के तीन और खेतों में रविवार को पगचिह्न मिलने के बाद पुष्टि हो गई है कि पिछले दिनों यहां बाघ ही आया था। उसके लौटने के निशान न मिलने के कारण क्षेत्र में ही उसके छिपे होने की आशंका के चलते कांबिंग की गई, मगर कुछ पता नहीं चला।
गुजरहाई गांव में शनिवार को लक्ष्मण के खेत में वन्यजीव के पगचिह्न मिले थे। वन दरोगा ने ये पगचिह्न बाघ के होना बताया था, वहीं गांव के नोनीराम ने तीन दिन पहले तेंदुआ देखे जाने की बात कही थी। इससे संशय हो गया था कि पगचिह्न बाघ के हैं या तेंदुए के। रविवार को रेंजर राजेश शर्मा, वन दरोगा अवनीश गंगवार, महेश आदि ने मौके पर जांच की तो पड़ोस में जगतपाल, जगदीश मौर्य और हेतराम मौर्य के खेतों में और पगचिह्न मिल गए। इन पगचिह्न से स्पष्ट हो गया कि बाघ ही आया था। उसके लौटने के निशान न मिलने के आधार पर रेंजर राजेश शर्मा का कहना है कि बाघ आसपास ही कहीं छिपा हो सकता है। जब तक उसका कोई अगला मूवमेंट नहीं मिलता तब तक उसका पता चलना मुश्किल है। ग्रामीणों को इन खेतों की ओर न जाने को कहा गया है।
टीम जांच को पहुंची तो बाघ के पगचिह्न मिले। ये पांच से दस दिन पुराने हैं। मौके पर किसी जानवर का शिकार होना नहीं पाया गया। अब तक बाघ देखे जाने की बात किसी ने नहीं बताई है। यह हो सकता है कि बाघ चला गया हो। फिलहाल विभाग की टीमें गश्त कर रही हैं। -भरतलाल, डीएफओ