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डिजिटल अरेस्ट: क्या है ये बला, जिससे आगरा की शिक्षिका की हुई मौत, बरेली में हो चुकी है 32 लाख की ठगी

Sat, 05 Oct 2024 01:56 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

Bareilly News: साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट कर लोगों को धमकाकर उनसे वसूली कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में आगरा की शिक्षिका की मौत हो गई थी। बरेली जिले में भी साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपये की ठगी कर चुके हैं।   
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digital arrest - फोटो : FREEPIK
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विस्तार
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आगरा में डिजिटल अरेस्ट से शिक्षिका मालती वर्मा मौत की घटना ने फिर लोगों को चौंकाया है। साइबर अपराधी बरेली में भी लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर वसूली कर चुके हैं। जिले में इस तरह के तीन मामले सामने आए हैं। साइबर थाना पुलिस मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। तत्परता से शिकायत करने पर रकम वापसी की भी गुंजाइश रहती है। 

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साइबर ठगों ने बरेली में सालभर पहले सबसे पहले शिकार भोजीपुरा में पढ़ाई कर रही मेडिकल छात्रा को बनाया था। उसे कोरियर फंसने व मुंबई में नवाब मलिक के मनी लॉन्ड्रिंग केस में उसके प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल होने का डर दिखाकर नौ लाख रुपये अलग-अलग खातों में डलवाए गए थे। छात्रा की शिकायत पर साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया। रकम का काफी हिस्सा ठगों ने डेबिट कार्ड से निकाल लिया था। बताते हैं कि करीब पांच लाख रुपये पुलिस ने फ्रीज करा दिए थे। 

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ऐसे करते हैं डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठग लोगों को व्हाट्सएप कॉल कर उनका कोरियर फंसने या किसी परिजन के ड्रग्स व सेक्स स्कैंडल में फंसने की जानकारी देकर उनसे रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। इस दौरान साइबर ठग अपने शिकार को उसके मोबाइल या लैपटॉप के सामने घंटों तक स्क्रीन पर बनाकर रखते हैं। उसे कॉल काटने या किसी अन्य से बात करने की इजाजत नहीं होती। 

इंजीनियर की पूरी रकम मिली
ग्रीन पार्क निवासी माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व इंजीनियर से 13 लाख की ठगी की गई थी। तत्काल शिकायत पर साइबर पुलिस ने पूरी रकम वापस करा दी। अग्रसेन नगर निवासी शख्स को भी कोरियर फंसने का डर दिखाकर दस लाख की ठगी की गई थी। उनके छह लाख रुपये साइबर टीम ने फ्रीज करा दिए। कुल मिलाकर करीब 32 लाख रुपये की ठगी इन लोगों से हुई। इसमें 24 लाख रुपये वापस आने का जरिया बन गया है। 

कई लोगों को आ चुकी कॉल, रहें सावधान
एक मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ चिकित्सक के पास इसी तरह साइबर ठगों की कॉल आई थी। उन्हें धमकाकर अकेले में जाने के लिए कहा गया था। काफी हद तक वह ठगों की बातों से घबरा भी गईं, पर ऐन वक्त पर कॉल काटने से वह बच गईं। आईजी से शिकायत के बाद साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में जांच भी की। इसी तरह कई और लोग अब तक सावधानी से बच चुके हैं। इनमें से करीब 15 लोग साइबर थाने तक पहुंचे, पर लिखित शिकायत नहीं की।
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पुलिस कभी नहीं करती ऐसी कार्रवाई
साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह बताते हैं कि सावधानी से ही ऐसे मामलों से बचा जा सकता है। लोगों को यह जानना चाहिए कि पुलिस या कोई अन्य एजेंंसी कभी इस तरह ऑनलाइन अरेस्ट नहीं करती। ये एक काल्पनिक तरीका है, जिसे साइबर ठग डराकर वसूली के लिए इस्तेमाल करते हैं। लोगों को डरना नहीं चाहिए। तत्काल कॉल काटकर परिजनों व पुलिस से संपर्क करना चाहिए।

डिजिटल अरेस्ट से संबंधित खबर का वीडियो 
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