बरेली में अव्यस्थाओं का रिकॉर्ड बना रहे स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा वायरल हुआ है। पिछले माह 18 और 26 नवंबर को 300 बेड कोविड चिकित्सालय के स्टोर रूम में बड़े पैमाने पर कोरोना संदिग्ध हजारों मरीजों के सैंपल बंद मिले थे। स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में इन सैंपल को जांच के लिए भेजने का दावा किया था, मगर उन्हें जांच कराने के बजाय उसे पांव से कुचलकर, उनके टुकड़ों को बोरियों में भरा और कचरे में फेंक दिया था। इसका वीडियो अब वायरल हो गया है और स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है।
इससे पहले हजारों कोविड संदिग्ध संक्रमितों के सैंपल की जांच न कराकर जिले को कोरोना मुक्त बनाने में जुटे अफसरों ने सैंपल बरबाद करने वालों की तलाश के लिए जांच समिति गठित कर दी थी। उन्हें प्रकरण की गंभीरता से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। साथ ही, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही थी।
आखिर क्या बताते रहे रिपोर्ट में
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते कोविड की जांच कराने वाले हजारों लोगों की रिपोर्ट पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक जब जांच ही नहीं हुई तो पोर्टल पर रिपोर्ट भी अपडेट नहीं की गई है। ऐसे में सैंपल कराने वाले तमाम लोग स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों के चक्कर काटते रहे। बताया जाता है कि स्वास्थ्यकर्मी कभी उन्हें स्टाफ की कमी के चलते रिपोर्ट अपडेट होने में देरी तो कभी नेटवर्क स्लो होने से रिपोर्ट देखने में दिक्कत आदि मनचाही समस्याएं बताते रहे। हैरत यह कि एक भी संदिग्ध ने रिपोर्ट न मिलने पर कोई हंगामा नहीं किया और न शिकायत ही दर्ज कराई है।