घटना के 27 साल बाद दर्ज कराई रिपोर्ट
वर्ष 2012 में बेटा अपने माता-पिता के बारे में पता करते हुए पीड़िता के पास पहुंचा। तब तक वह 17 साल का हो चुका था। उसने हौसला दिया तो पीड़िता ने पांच मार्च 2021 को सदर बाजार थाने में केस दर्ज कराया। महिला की गुजारिश पर बेटे का डीएनए टेस्ट कराया गया, जो नकी हसन से मिला। पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत भेजा। अपर सत्र न्यायाधीश (षष्टम) लवी यादव ने दोनों दोषियों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाते हुए 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वर्ष 1994 में नकी 25 और गुड्डू 22 वर्ष का था।