'...भले ही उसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े'
पत्र में आगे लिखा कि एक सांसद के तौर पर मेरा कार्यकाल भले समाप्त हो रहा हो, पर पीलीभीत से मेरा रिश्ता अंतिम सांस तक खत्म नहीं हो सकता। मैं राजनीति में आम आदमी की आवाज उठाने आया था और आज आपसे यही आशीर्वाद मांगता हूं कि सदैव यह कार्य करता रहूं, भले ही उसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े। उन्होंने पीलीभीत से अपने रिश्ते को सियासी गुणा-भाग से बहुत ऊपर बताया। अंत में लिखा- मैं आपका था, हूं और रहूंगा।