नतीजा रहा कि महज 23 वर्ष की उम्र में ही आईएएस बनने का सपना पूरा होने जा रहा है। बताया कि पढ़ाई के लिए उन्होंने अलग से कोई तैयारी नहीं की। बल्कि लक्ष्य साधा, अनुशासन व सकारात्मक विचार के साथ पढ़ाई जारी रखी और सफलता हासिल की है।
उधर, बेटी की सफलता से पिता का हृदय गदगद है। बोले- उनके खानदान में पहली बार किसी को सरकारी नौकरी मिलेगी और वह भी आईएएस की। आईएएस बनने की ललक देखकर उन्हें आभास था कि एक बार में न सही पर आगे सफलता जरूर मिलेगी।
माता-पिता के साथ प्रेक्षा अग्रवाल (हरी साड़ी में)
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प्रेक्षा अग्रवाल ने छोड़ दी थी डिफेंस की नौकरी
सैदपुर हॉकिन्स के अंबिका आवास कॉलोनी की रहने वाली प्रेक्षा अग्रवाल ने आखिरकार चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा न सिर्फ क्रैक की बल्कि 30वी रैंक हासिल कर आईएएस कैडर हासिल करने में भी सफल रही हैं। इन्होंने पिछली यूपीएससी परीक्षा में भी 303वीं रैंक हासिल की थी। मगर इंडियन डिफेंस सर्विस कैडर मिलने से उन्होंने दोबारा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।
प्रेक्षा ने बताया कि उनकी हाईस्कूल और इंटर तक की पढ़ाई हार्टमन कॉलेज से हुई थी। दोनों ही परीक्षा में वह जिला स्तर पर टॉपर रहीं। इसके बाद एनआईटी भोपाल से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। मां संगीता अग्रवाल एलआईसी में असिस्टेंट ऑफिसर हैं।
बीएसएनल से सेवानिवृत्त पिता पियूष कांत अग्रवाल ने बताया कि बिटिया के शैक्षिक प्रदर्शन को देखते हुए दोनों को उम्मीद थी कि वह आईएएस बनकर समाज की सेवा करेगी। बीटेक पढ़ाई के साथ ही, प्रेक्षा ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। दो प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंची थी। तीसरे में इंटरव्यू भी क्लियर हुआ। पर डिफेंस कैडर मिला तो उन्होंने दोबारा तैयारी का सुझाव दिया।
कड़ी मेहनत का नतीजा रहा कि प्रेक्षा ने इस बार 30वीं रैंक हासिल कर देश में बरेली का मान बढ़ाया है। तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को प्रेक्षा ने बताया है कि वह लक्ष्य तय करें और कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करें। भटकाव न हो और सफलता जरूरी मिलेगी इसका भरोसा रखें, तभी सफलता मिलेगी। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अभिभावक को दिया है। स्वामी विवेकानंद उनके प्रेरणास्रोत रहे।