बरेली। रामायण में मंच, साज-सज्जा से ज्यादा महत्व पात्रों के अभिनय का होता है। अभिनय जितना जीवंत होता है मंचन को उतनी ही सराहना मिलती है। राम की मर्यादा, लक्ष्मण का तेज और रावण का ज्ञान अपने अभिनय से मंच पर जीवंत करना कठिन काम है।
इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में बेटियां भी पीछे नहीं हैं। उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज की ओर से किए जा रहे रामलीला मंचन में वह कई किरदार निभा रही हैं। इस अभिनय के जरिये वह रामायण के विभिन्न किरदारों से मर्यादा की सीख भी ले रही हैं।
समिति के पदाधिकारियों की मानें तो सरकार के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरणा लेकर, वर्ष 2022 में महिला प्रधान रामलीला का मंचन करने का निर्णय लिया। अब 10 से अधिक बेटियां कंधे पर धनुष और हाथों में गदा और तलवार लेकर रामकथा को जन-जन तक पहुंचाने के कार्य में जुटी हैं।
कार्यशाला में दिया जाता है प्रशिक्षण
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बेटियों को अभिनय में परिपक्व करने के लिए रामलीला महोत्सव से दो महीने पूर्व मंचन कार्यशाला आयोजित की जाती है। जिसमें अनुभवी कलाकार और निर्देशकों की ओर से बेटियों को अभिनय के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाता है। पात्रों के धार्मिक महत्व को भी समझाया जाता है। यह कवायद करने का मकसद है कि बेटियां पात्रों के साथ जुड़ाव महसूस कर पाएं और उत्कृष्ट प्रस्तुति दें।
शहर में बनाई एक अलग पहचान
जब बेटियां राम, लक्ष्मण, सीता जैसे किरदार निभाती हैं, तो लोग भी बड़े उत्साह के साथ बेटियों की प्रस्तुति को देखते हैं और उनकी हौसला अफजाई करते हैं। इसके अतिरिक्त वह विभिन्न मंचों पर भी अभिनय कर चुकी हैं। चाहें वह स्थानीय मैदान हो, विद्यालय का मंच या फिर काेई सांस्कृतिक उत्सव। इन बेटियों ने हर जगह ख्याति ही हासिल की है।
परिजनों से मिलता है भरपूर सहयोग
रामलीला में राम का किरदार निभा रहीं प्ररेणा जोशी ने बताया कि उनके परिजन भी भरपूर सहयोग करते हैं। सीता का अभिनय करने वाली यशिका पाठक के मुताबिक, उनका परिवार उनकी कला को निखारने में आवश्यक सहायता प्रदान करता है। लीला मंचन के दौरान भी उत्साह बढ़ाने के लिए परिवार के सदस्य मौजूद रहते हैं। लक्ष्मण का किरदार निभाने वाली प्रियांशी पाठक ने बताया कि लंबे-लंबे संवाद याद कराने में परिजन मदद करते हैं। संवाद