टीकों की गुणवत्ता परख रहा आईवीआरआई
संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) के तहत आईवीआरआई को आयातित, घरेलू उत्पादित टीकों की गुणवत्ता परीक्षण का कार्य केंद्र सरकार ने सौंपा है। अभी 23 वायरल, 11 बैक्टीरियल, टीकों का परीक्षण हो रहा है। इसके अलावा ब्रूसेल्ला और पीपीआर वैक्सीन के 200 बैच, एफएमडी के 400 बैच, सीएसएफ वैक्सीन के 50 बैच परीक्षण का लक्ष्य है।
क्षमता निर्माण के लिए मांगे जरूरी संसाधन
निदेशकों ने अपने-अपने राज्यों में पशुपालन, रोग निदान और पशु चिकित्सकों के क्षमता निर्माण से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने गर्भाशय निदान के लिए किट, खाद्य स्वच्छता प्रयोगशाला का विकास, स्वदेशी टीकों का विकास, आनुवंशिक उन्नयन, डीएनए लैब, अफ्रीकी स्वाइन फीवर डायग्नोसिस और वायबल वैक्सीन के विकास, ब्रूसेला के साथ एफएमडी, एचएस और बीक्यू के लिए संयुक्त वैक्सीन उत्पादन, फेरोमोन आधारित उत्पादों से संबंधित एथनो-वेटनरी चिकित्सा पद्धति, पशु बायोमेट्रिक्स, इलेक्ट्रॉनिक डोंगल आदि की मांग रखी।
इंटरफेस मीट में यह रहे मौजूद
संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी, संयुक्त निदेशक, शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बबलू कुमार, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह,आईटीएमयू प्रभारी डॉ. अनुज चौहान, पशु पुनरूत्पादन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एमएच खान आदि वैज्ञानिकों ने भी आईवीआरआई के कार्यों की प्रस्तुति दी।